भारतीय आमों पर नेपाल-जापान का बड़ा एक्शन! अमेरिका-यूके में जबरदस्त डिमांड के बीच क्यों लगा आयात प्रतिबंध?
नई दिल्ली: दुनिया भर में अपनी मिठास और स्वाद के लिए मशहूर भारतीय आमों को लेकर बड़ा झटका सामने आया है। अमेरिका, ब्रिटेन और खाड़ी देशों में जहां भारतीय आमों की भारी मांग बनी हुई है, वहीं जापान के बाद अब नेपाल ने भी भारत से आने वाले आम और कई अन्य फलों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। बताया जा रहा है कि भारतीय फलों की खेप में तय मानकों से अधिक रासायनिक कीटनाशकों की मौजूदगी पाए जाने के बाद यह फैसला लिया गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नेपाल सरकार ने कृषि और पशुधन विकास मंत्रालय के माध्यम से अप्रैल-मई से ही यह प्रतिबंध लागू कर रखा है। सीमा पर तैनात क्वारंटाइन अधिकारियों की जांच में भारतीय फलों में खतरनाक कीटनाशकों की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई थी, जिसके बाद आयात पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया।
भारतीय आम निर्यात को लग सकता है बड़ा झटका
नेपाल के इस फैसले का असर भारत के आम निर्यात पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। खासकर गर्मियों के सीजन में लोकप्रिय और प्रीमियम किस्मों जैसे अल्फांसो, दशहरी, चौसा, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली के निर्यात को नुकसान हो सकता है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है और यहां उत्पादित आमों का एक हिस्सा वैश्विक बाजारों में निर्यात किया जाता है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय आम 50 से अधिक देशों में भेजे जाते हैं।
खाड़ी देशों से लेकर अमेरिका-ब्रिटेन तक है भारतीय आमों की मांग
भारतीय आमों की सबसे अधिक मांग खाड़ी देशों में देखी जाती है। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन भारतीय आमों के बड़े बाजार माने जाते हैं।
इसके अलावा नेपाल, बांग्लादेश और भूटान जैसे पड़ोसी देशों में भी सड़क मार्ग के जरिए बड़ी मात्रा में आमों की आपूर्ति होती रही है। यूरोप और पश्चिमी देशों की बात करें तो ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड, अमेरिका और कनाडा में भी भारतीय आम बेहद लोकप्रिय हैं। वहीं सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड और जापान भी प्रमुख खरीदारों में शामिल रहे हैं।
विदेशों में इन किस्मों की सबसे ज्यादा मांग
अंतरराष्ट्रीय बाजार में महाराष्ट्र का अल्फांसो आम अपनी विशेष खुशबू और स्वाद के कारण सबसे महंगा और पसंदीदा माना जाता है। इसके अलावा गुजरात का केसर, उत्तर भारत का दशहरी और चौसा तथा दक्षिण भारत का बंगनपल्ली विदेशी ग्राहकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं।
नेपाल में बाजार पर बढ़ सकता है दबाव
नेपाल के व्यापारिक संगठनों ने इस प्रतिबंध पर चिंता जताई है। स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि देश की मांग को केवल घरेलू उत्पादन के जरिए पूरा करना आसान नहीं होगा। गर्मियों के मौसम में आम की खपत काफी बढ़ जाती है और भारतीय आमों का आयात रुकने से बाजार में कमी पैदा हो सकती है।
जनकपुरधाम के फल एवं सब्जी व्यवसायी संघ के महासचिव भुवनेश्वर पुर्बे ने मांग की है कि सरकार पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय गुणवत्ता जांच की व्यवस्था को मजबूत करे और परीक्षण के बाद सुरक्षित फलों के आयात की अनुमति दे।
नेपाल सरकार ने बताया किसानों के लिए अवसर
दूसरी ओर, नेपाली प्रशासन इस फैसले को स्थानीय किसानों के लिए लाभकारी मान रहा है। मधेस प्रांत के भूमि प्रबंधन, कृषि और सहकारी मंत्रालय के प्रवक्ता मनीष कुमार पाल के अनुसार, इस कदम से स्थानीय स्तर पर उत्पादित फलों को बेहतर बाजार मिलेगा और उपभोक्ताओं को अधिक सुरक्षित तथा कम रासायनिक अवशेष वाले फल उपलब्ध हो सकेंगे।
उन्होंने कहा कि इससे घरेलू किसानों को प्रोत्साहन मिलेगा और स्थानीय कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
जापान भी पहले लगा चुका है रोक
नेपाल से पहले जापान ने भी भारतीय आमों के आयात पर रोक लगाई थी। जापानी अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान भारत के ट्रीटमेंट सेंटरों में कीट नियंत्रण प्रक्रिया में कमियां पाई थीं। लगभग दो दशक बाद यह पहला मौका बताया जा रहा है जब जापान ने भारतीय आमों पर इस तरह की रोक लगाई है।
इससे पहले जापान ने फल मक्खी के खतरे को देखते हुए प्रतिबंध लगाया था, जिसे भारत द्वारा सुरक्षा उपायों को मजबूत किए जाने के बाद वर्ष 2006 में हटा लिया गया था।
निर्यातकों और किसानों की बढ़ी चिंता
भारत हर वर्ष करीब 2.8 करोड़ मीट्रिक टन आम का उत्पादन करता है। हालांकि इसका अधिकांश हिस्सा देश के भीतर ही खपत हो जाता है, लेकिन जापान जैसे प्रीमियम बाजारों में निर्यात से किसानों और निर्यातकों को बेहतर कीमत और अधिक लाभ मिलता है। ऐसे में नेपाल और जापान जैसे बाजारों में प्रतिबंध ने निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है।



