ओडिशा में इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला, 32 मिनट तक बैंक में भटकता रहा जीतू मुंडा; बहन का कंकाल लेकर पहुंचने की घटना में बैंक की लापरवाही उजागर
ओडिशा के क्योंझर जिले से सामने आया जीतू मुंडा का मामला अब और गंभीर होता जा रहा है। अपनी मृत बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचने वाले आदिवासी युवक के मामले में शुरुआती प्रशासनिक जांच में बैंक कर्मचारियों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। जांच में संकेत मिले हैं कि युवक को मजबूरी और निराशा में ऐसा कदम उठाना पड़ा।
मामले की जांच के दौरान सामने आई टाइमलाइन ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया गया है कि 42 वर्षीय जीतू मुंडा 27 अप्रैल को ओडिशा ग्रामीण बैंक की मालिपोसी शाखा में अपनी बहन के खाते से पैसे निकालने पहुंचे थे। वह करीब 32 मिनट तक बैंक परिसर में मौजूद रहे, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया।
सीसीटीवी फुटेज में सामने आई पूरी कहानी
प्रशासन द्वारा जांच में देखे गए सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक, जीतू मुंडा सुबह 11 बजकर 26 मिनट पर बैंक में दाखिल हुए थे और 11 बजकर 58 मिनट पर बाहर निकले। इस दौरान उन्होंने दो बार बैंक मैनेजर से मुलाकात की। इसके अलावा कैशियर और अन्य कर्मचारियों से भी बात की, लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली।
जांच में यह भी सामने आया कि जीतू मुंडा लगातार अधिकारियों और कर्मचारियों से मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन हर बार उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। फुटेज में उनके साथ एक अन्य व्यक्ति भी दिखाई दिया, जो उन्हें समझाने और स्थिति संभालने की कोशिश करता नजर आया।
राजस्व आयुक्त खुद पहुंचे बैंक, जांच में दिखी गैरजिम्मेदारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तरी संभाग के राजस्व आयुक्त संग्राम केशरी महापात्रा खुद बैंक पहुंचे। उनके साथ जिला कलेक्टर विशाल सिंह समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बैंक की मालिपोसी शाखा में जाकर करीब एक घंटे तक सीसीटीवी फुटेज की जांच की और बैंक कर्मचारियों से पूछताछ की।
राजस्व आयुक्त ने जांच के बाद कहा कि शुरुआती तथ्यों से बैंक कर्मचारियों की गैरजिम्मेदारी साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने बताया कि सीसीटीवी में ऑडियो नहीं होने की वजह से बातचीत का सही विवरण सामने नहीं आ पाया, लेकिन फुटेज में जीतू मुंडा की बॉडी लैंग्वेज और कर्मचारियों का व्यवहार यह संकेत देता है कि उन्हें लगातार टाल दिया गया।
उन्होंने कहा कि युवक कई बार अलग-अलग कर्मचारियों के पास गया, लेकिन उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला। प्रशासन ने इसे बेहद संवेदनशील और शर्मनाक मामला बताया है।
बहन की मौत साबित करने के लिए कब्र से निकाला कंकाल
जानकारी के मुताबिक, जीतू मुंडा अपनी बहन कलारा मुंडा के खाते से करीब 19 हजार रुपये निकालना चाहते थे। उनकी बहन की फरवरी में मौत हो चुकी थी और उनका कोई कानूनी वारिस नहीं था।
बैंक अधिकारियों ने राशि देने से इनकार करते हुए मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी वारिस प्रमाण पत्र जमा करने को कहा। आरोप है कि अंत में बैंक मैनेजर ने उन्हें बैंक से बाहर जाने के लिए कह दिया।
इससे आहत और नाराज जीतू मुंडा ने कथित तौर पर अपनी बहन के शव को कब्र से निकालकर उसका कंकाल बैंक में लाकर दिखाया, ताकि वह उसकी मौत साबित कर सकें। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया।
पहले भी कई बार बैंक आ चुके थे भाई-बहन
जांच के दौरान अधिकारियों ने यह भी पाया कि जीतू मुंडा और उनकी बहन पहले भी कई बार बैंक आ चुके थे। बताया गया कि दोनों कम से कम आठ बार बैंक में लेन-देन कर चुके थे और कर्मचारी उन्हें पहचानते थे।
ऐसे में प्रशासन ने सवाल उठाया है कि जब बैंक कर्मचारियों को ग्राहक की पहचान थी, तो उन्हें प्रक्रिया समझाने और आवश्यक सहायता देने में संवेदनशीलता क्यों नहीं दिखाई गई।
बैंक ने आरोपों से किया इनकार
वहीं बैंक अधिकारियों ने पहले इस बात से इनकार किया था कि उन्होंने युवक को शव लाने के लिए कहा था। बैंक की ओर से दावा किया गया कि जीतू मुंडा कथित तौर पर नशे की हालत में थे और उन्हें बैंकिंग प्रक्रिया की सही जानकारी नहीं थी।
बैंक का कहना है कि युवक ने आवश्यक दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया को समझने से इनकार कर दिया था। हालांकि बाद में मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी वारिस प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के बाद बैंक ने 19,402 रुपये की राशि जारी कर दी।
मृत्यु प्रमाण पत्र में देरी पर भी उठे सवाल
राजस्व आयुक्त ने जांच के दौरान यह सवाल भी उठाया कि फरवरी में मौत होने के बावजूद करीब तीन महीने तक मृत्यु प्रमाण पत्र क्यों जारी नहीं किया गया। प्रशासन अब स्थानीय रजिस्ट्रार की भूमिका की भी जांच कर रहा है।
फिलहाल पूरे मामले की प्रशासनिक जांच जारी है। अधिकारियों ने साफ कहा है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।



