250 पहियों वाले बाहुबली ट्रक की बढ़ी रफ्तार, लखीमपुर खीरी पहुंची 200 टन की मशीन; अब बलरामपुर चीनी मिल की बारी

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लखीमपुर खीरी: बेल्जियम से ओडिशा के रास्ते भारत लाई गई करीब 200 टन वजनी औद्योगिक मशीन अब अपनी मंजिल के और करीब पहुंच गई है। मशीन को लेकर चल रहा 250 पहियों वाला विशालकाय ट्रक लखीमपुर खीरी में प्रवेश कर चुका है। पहले यह भारी-भरकम वाहन एक दिन में महज 10 किलोमीटर की दूरी तय कर पा रहा था, लेकिन अब इसकी रफ्तार बढ़कर रोजाना करीब 50 किलोमीटर हो गई है। यह मशीन जिले के कुंभी स्थित बलरामपुर चीनी मिल में पहुंचाई जानी है, जहां इसे बायो-पॉलिमर यानी बायो-प्लास्टिक प्लांट में स्थापित किया जाएगा।

करीब 200 टन वजनी इस मशीन को रिएक्टर वेसल और वैक्यूम वेसल मशीन के रूप में बताया गया है। विशाल आकार और अत्यधिक वजन के कारण इसे विशेष हाइड्रोलिक ट्रक के जरिए लाया जा रहा है। जब यह ट्रक ओडिशा से अपनी यात्रा पर निकला था, तब इसमें 308 पहिए लगे थे और इसकी गति बेहद धीमी थी। बाद में ट्रक के 58 पहिए कम कर दिए गए, जिसके बाद इसकी रफ्तार बढ़ने की बात सामने आई है। हालांकि, अभी यह ट्रक बलरामपुर चीनी मिल तक नहीं पहुंचा है।

पहियों की संख्या घटने के बाद बढ़ी रफ्तार

विशालकाय ट्रक की यात्रा लगातार चर्चा में बनी हुई है। शुरुआत में इसकी धीमी गति के चलते एक दिन में लगभग 10 किलोमीटर का सफर ही तय हो पा रहा था। अब यह प्रतिदिन करीब 50 किलोमीटर की दूरी तय कर रहा है। इसी रफ्तार के साथ ट्रक ने लखीमपुर खीरी जिले में प्रवेश कर लिया है और जल्द ही अपने गंतव्य तक पहुंच सकता है।

इस ट्रक पर लदी मशीन को कुंभी स्थित बलरामपुर चीनी मिल में स्थापित किया जाना है। यह मशीन बायो-पॉलिमर यानी बायो-प्लास्टिक प्लांट का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। मशीन की आपूर्ति बेल्जियम से की गई है और इसे निर्धारित स्थान तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए प्रशासन तथा मिल प्रबंधन की ओर से विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।

ट्रक को रास्ता देने के लिए पुलिस ने संभाली कमान

विशालकाय ट्रक की आवाजाही के दौरान यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है। ट्रक के आगे चल रहे वाहनों को हटाकर इसके लिए रास्ता बनाया जा रहा है। इस प्रक्रिया का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है। लखीमपुर खीरी में ट्रक के पहुंचने की खबर मिलते ही ग्रामीणों और राहगीरों में इसे देखने की उत्सुकता बढ़ गई। लोग इसके विशाल आकार, पहियों की बनावट और मशीन को अपने मोबाइल फोन में कैद करते नजर आए।

ट्रक पर लदी मशीन की लंबाई 41 मीटर से अधिक बताई गई है। इसके भारी वजन और विशाल आकार को देखते हुए प्रशासन और तकनीकी टीम सतर्कता बरत रही है। वाहन को रास्ते में किसी तरह की बाधा से बचाने के लिए मार्ग की स्थिति पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

ट्रक के रास्ते से हटाए गए स्मृति द्वार और साइन बोर्ड

बलरामपुर चीनी मिल तक मशीन पहुंचाने के लिए लखीमपुर-मोहम्मदी मार्ग पर पहले से तैयारियां की गई थीं। ट्रक के गुजरने में बाधा बनने वाले स्मृति द्वारों और सड़क किनारे लगे साइन बोर्डों को क्रेन की मदद से हटाया गया। इनमें गांव आंवल में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मनीराम मिश्र स्मृति द्वार, भीखमपुर कस्बे में अमर शहीद पंडित राजनारायण मिश्रा स्मृति द्वार और पूर्व मंत्री स्वर्गीय रामकुमार वर्मा स्मृति द्वार शामिल हैं। इसके अलावा मार्ग पर लगे अन्य बोर्ड भी हटाए गए, ताकि विशाल ट्रक बिना रुकावट आगे बढ़ सके।

प्रशासन और चीनी मिल प्रबंधन की ओर से मशीन को सुरक्षित तरीके से गंतव्य तक पहुंचाने के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है। अब ट्रक के लखीमपुर खीरी पहुंचने के बाद लोगों की नजर इस बात पर है कि 200 टन वजनी यह मशीन कुंभी स्थित बलरामपुर चीनी मिल कब पहुंचेगी।

 

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