मेरठ में ₹200 करोड़ से बनेगी क्रिटिकल मिनरल और रेयर अर्थ रिफाइनरी, 1,300 लोगों के लिए खुलेंगे रोजगार के रास्ते
पुरानी बैटरियों से निकाले जाएंगे लिथियम, कोबाल्ट और निकेल
यूपी स्टार्टअप मिशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुमित महाजन ने बताया कि राज्य सरकार स्थानीय उद्यमियों, स्टार्टअप और तकनीक आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। यूपी स्टार्टअप मिशन के माध्यम से नए विचारों को व्यावसायिक परियोजनाओं में बदलने और स्टार्टअप को औद्योगिक स्तर पर आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मेरठ में प्रस्तावित रिफाइनरी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नई तकनीक पर आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
कंपनी की योजना रिफाइनरी को चरणबद्ध तरीके से विकसित करने की है। पूरी क्षमता से संचालन शुरू होने के बाद इसमें हर साल 10,000 टन सामग्री के प्रसंस्करण का लक्ष्य रखा गया है। यहां इस्तेमाल हो चुकी लिथियम-आयन बैटरियों से लिथियम, कोबाल्ट और निकेल जैसे महत्वपूर्ण खनिज निकाले जाएंगे। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, हार्ड ड्राइव और इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटरों में इस्तेमाल होने वाले पुराने स्थायी चुंबकों से नियोडिमियम, डिस्प्रोसियम और टर्बियम जैसे रेयर अर्थ तत्व भी प्राप्त किए जाएंगे।
इलेक्ट्रिक वाहन से लेकर रक्षा क्षेत्र तक उपयोगी होंगे खनिज
लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और रेयर अर्थ तत्वों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र में किया जाता है। इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों से लेकर आधुनिक तकनीकी उपकरणों और ऊर्जा उत्पादन से जुड़े संयंत्रों तक इन खनिजों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में पुरानी बैटरियों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से इन तत्वों को दोबारा प्राप्त करने से उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा। साथ ही, देश में इन खनिजों की घरेलू आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
महत्वपूर्ण खनिजों के आयात पर निर्भरता घटाने की तैयारी
यूपी स्टार्टअप मिशन के सीईओ के मुताबिक, लिथियम, कोबाल्ट और निकेल की घरेलू जरूरतों का लगभग पूरा हिस्सा आयात से पूरा किया जाता है। रेयर अर्थ स्थायी चुंबकों की आपूर्ति में भी आयात पर निर्भरता एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में देश के भीतर रीसाइक्लिंग और रिफाइनिंग की क्षमता बढ़ाना जरूरी है।
केंद्र सरकार भी महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए कदम उठा रही है। राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन के तहत महत्वपूर्ण खनिजों की पूरी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत ई-कचरे और इस्तेमाल की जा चुकी बैटरियों से महत्वपूर्ण खनिजों की रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहित करने के लिए 1,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना भी शामिल है।
इसके अलावा, नवंबर 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में रेयर अर्थ स्थायी चुंबकों के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए 7,280 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी थी। इस योजना के तहत सालाना 6,000 टन उत्पादन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। मेरठ में प्रस्तावित रिफाइनरी से मिलने वाले पुनर्चक्रित खनिज और रेयर अर्थ ऑक्साइड देश की औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।
यूपी स्टार्टअप मिशन के सहयोग से आगे बढ़ेगी परियोजना
मेरठ स्थित सर्कुलॉजी क्लीनटेक उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) से मान्यता प्राप्त डीप टेक स्टार्टअप है। कंपनी संसाधनों के पुनर्चक्रण और दोबारा इस्तेमाल यानी सर्कुलर इकोनॉमी के क्षेत्र में काम करती है। उसे उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप तंत्र के तहत यूपी स्टार्टअप मिशन से सहयोग मिला है।
समझौते के तहत राज्य सरकार परियोजना के लिए जरूरी स्वीकृतियां और मंजूरियां प्राप्त करने में सुविधा उपलब्ध कराएगी। इसके साथ ही लागू नियमों के अनुसार केंद्र और राज्य सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ दिलाने में भी सहयोग किया जाएगा।
करीब 200 करोड़ रुपये की यह प्रस्तावित परियोजना मेरठ में तकनीक आधारित उद्योगों के विस्तार और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे शहर को पारंपरिक औद्योगिक गतिविधियों के साथ महत्वपूर्ण खनिजों के पुनर्चक्रण और शोधन जैसे उभरते क्षेत्रों में भी नई पहचान मिलने की संभावना है।





