‘भारत पानी को हथियार बना रहा’, सिंधु जल संधि पर फिर भड़का पाकिस्तान, शहबाज सरकार ने भारत को दी चेतावनी

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इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि को लेकर एक बार फिर भारत पर निशाना साधा है। शहबाज सरकार में सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने भारत पर पानी को हथियार की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सिंधु जल संधि को रोकने का फैसला वैश्विक स्तर पर सीमा-पार जल प्रबंधन को प्रभावित कर सकता है। तरार ने पाकिस्तान को शांतिप्रिय देश बताते हुए कहा कि यह संधि देश के 24 करोड़ लोगों का बुनियादी अधिकार है।

तरार ने दावा किया कि भारत सिंधु जल संधि को एकतरफा तौर पर निलंबित नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने अहम राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ बातचीत जारी रखेगा।

सिंधु जल संधि पर क्या बोला पाकिस्तान?

इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटेजिक स्टडीज इस्लामाबाद में सिंधु जल संधि पर एक रिपोर्ट लॉन्च करने के लिए आयोजित कार्यक्रम में अताउल्लाह तरार ने कहा कि पाकिस्तान शांतिप्रिय देश है, लेकिन वह भारत को पानी को हथियार बनाने की अनुमति नहीं दे सकता। उन्होंने कहा कि सिंधु जल संधि पाकिस्तान के 24 करोड़ लोगों का बुनियादी अधिकार है।

तरार ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई देश विवाद सुलझाने के स्थापित तरीकों के बावजूद किसी बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय जल संधि को एकतरफा तौर पर रोक सकता है, तो इसका असर दुनियाभर में सीमा-पार जल प्रबंधन पर पड़ेगा।

अताउल्लाह तरार ने भारत को दी चेतावनी

अताउल्लाह तरार ने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ अपनी बातचीत जारी रखेगा और देश के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा। उन्होंने सिंधु नदी से पाकिस्तान के जुड़ाव का भी जिक्र किया।

तरार ने कहा कि उन्हें इस बात पर गर्व है कि पाकिस्तान जहां भी जाता है, वहां खुद को सिंधु घाटी के लोगों के रूप में पहचानता है और सिंधु के पानी से अपना संबंध जोड़ता है। उन्होंने दावा किया कि सिंधु जल संधि दोनों देशों के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी है।

संधि को लेकर एकतरफा बदलाव पर किया दावा

तरार ने दावा किया कि सिंधु जल संधि में ऐसी शर्तें मौजूद हैं, जिनके तहत इस कानूनी दस्तावेज को एकतरफा तरीके से रद्द, समाप्त या बदला नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि संधि को एकतरफा तौर पर बदलने, रद्द करने, खत्म करने या कुछ समय के लिए रोकने का भी प्रावधान नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी विवाद की स्थिति में दोनों पक्षों को संधि में तय शर्तों और नियमों का पालन करना होगा। इस दौरान तरार ने परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के अगस्त के फैसले का जिक्र करते हुए दावा किया कि अदालत ने पाकिस्तान के रुख का समर्थन किया और इस बात को मजबूती दी कि संधि की स्थिति को एकतरफा तरीके से बदला नहीं जा सकता।

शहबाज शरीफ के UNGA भाषण का भी किया जिक्र

अताउल्लाह तरार ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने सिंधु जल संधि को पाकिस्तान के लोगों और पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा बताया था।

तरार के मुताबिक, शहबाज शरीफ ने कहा था कि इस अधिकार को छीनने की किसी भी कोशिश को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। सूचना मंत्री ने कहा कि सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान का रुख पूरी तरह स्पष्ट है और वह इसे क्षेत्र में शांति तथा स्थिरता का माध्यम मानता है।

 

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