इंग्लिश चैनल पार कर ब्रिटेन पहुंचने वाले प्रवासियों पर बड़ा फैसला, UK ने फ्रांस के साथ ‘एक के बदले एक’ समझौता किया खत्म
लंदन: ब्रिटेन और फ्रांस के बीच छोटी नावों से इंग्लिश चैनल पार करके ब्रिटेन आने वाले प्रवासियों को रोकने के लिए चल रही एक योजना अब खत्म कर दी गई है। ब्रिटेन सरकार ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। इस योजना का उद्देश्य खतरनाक तरीके से समुद्री रास्ते से ब्रिटेन पहुंचने वाले लोगों की संख्या कम करना था।
गृह मंत्रालय के मुताबिक, तथाकथित ‘एक के बदले एक’ समझौते के तहत अब नए मामलों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस व्यवस्था में खतरनाक तरीके से छोटी नावों के जरिए इंग्लिश चैनल पार करके ब्रिटेन पहुंचने वाले लोगों को हिरासत में लेकर फ्रांस वापस भेजा जा सकता था। इसके बदले फ्रांस से उतने ही शरण मांगने वाले लोगों को ब्रिटेन लाया जाना था, जिन्होंने सुरक्षित और कानूनी रास्ते से ब्रिटेन में शरण के लिए आवेदन किया था।
इस समझौते के तहत करीब 1,500 लोगों को फ्रांस वापस भेजा गया है। इसके बदले इससे थोड़े कम लोगों को ब्रिटेन लाया गया। योजना अब सक्रिय नहीं है, हालांकि गृह मंत्रालय ने कहा है कि जिन लोगों को पहले ही हिरासत में लिया जा चुका है, उन्हें आने वाले हफ्तों में विमान से फ्रांस वापस भेजने की प्रक्रिया जारी रहेगी।
इस साल क्यों घटी छोटी नावों से ब्रिटेन आने वालों की संख्या?
फिलहाल इंग्लिश चैनल के हालात पिछले साल की तुलना में काफी अलग हैं। इस साल छोटी नावों से चैनल पार करके ब्रिटेन पहुंचने वाले लोगों की संख्या तेजी से घटी है और यह आंकड़ा पांच साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।
इसके पीछे कई वजहें बताई गई हैं। इनमें पुलिस की बढ़ी हुई गश्त और उत्तरी फ्रांस में निगरानी बढ़ाना प्रमुख है। इस साल अब तक करीब 19 हजार लोगों ने इंग्लिश चैनल पार किया है। पिछले साल इसी अवधि की तुलना में यह संख्या करीब 40 प्रतिशत कम है।
छोटी नावों से इंग्लिश चैनल पार करना कितना खतरनाक?
सोमवार को हुई एक घटना ने इस समुद्री यात्रा के जोखिम को सामने ला दिया। एक छोटी नाव में 100 से ज्यादा लोगों के सवार होने की बात सामने आई। भीड़ के बीच दबकर कुचले जाने से 10 साल के एक बच्चे और दो महिलाओं की मौत हो गई।
ब्रिटेन और फ्रांस के बीच सहयोग क्यों पड़ा था धीमा?
वर्ष 2020 में ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने के बाद छोटी नावों से आने वाले लोगों को रोकने के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच सहयोग धीमा पड़ गया था। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में ब्रिटेन और फ्रांस ने इस समस्या से निपटने के लिए कई समझौते किए।
छोटी नावों के जरिए इंग्लिश चैनल पार करके ब्रिटेन पहुंचना हाल के वर्षों में देश का बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। लगातार आने वाली सरकारों पर इस समस्या को रोकने में असमर्थ रहने के आरोप लगते रहे हैं। इसे लेकर कई प्रदर्शन और दंगे भी हुए हैं। यह मुद्दा दक्षिणपंथी रिफॉर्म यूके पार्टी के बढ़ते प्रभाव में भी एक कारक रहा है।





