पीएचडी पर सख्ती: बिहार के विश्वविद्यालयों में अब हर शोध का ब्योरा होगा सार्वजनिक, गाइड और शोधार्थियों की जानकारी भी वेबसाइट पर
मुजफ्फरपुर: बिहार के विश्वविद्यालयों में होने वाले शोध कार्यों को अब सार्वजनिक किया जाएगा। लोकभवन ने सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि पीएचडी के नियमों के तहत अपने यहां चल रहे शोध के विषय और टॉपिक विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड करें। इसका उद्देश्य एक ही विषय पर होने वाले शोध के दोहराव को रोकना है। वेबसाइट पर जानकारी उपलब्ध होने से यह पता चल सकेगा कि किस विश्वविद्यालय में किस विषय और किस टॉपिक पर शोध चल रहा है। बीआरएबीयू के डीएसडब्ल्यू प्रो. आलोक प्रताप सिंह ने इसे बेहतर पहल बताया है। उनका कहना है कि इससे छात्रों को भी फायदा होगा।
शोध गाइड और शोधार्थियों की जानकारी भी होगी सार्वजनिक
नई व्यवस्था के तहत विश्वविद्यालयों को शोध गाइड की जानकारी भी अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करनी होगी। इसमें यह बताया जाएगा कि किस विषय में कौन से प्रोफेसर या एसोसिएट प्रोफेसर शोध गाइड हैं। इसके साथ ही प्रत्येक गाइड के साथ पंजीकृत शोधार्थियों की संख्या और उनके शोध के विषयों की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी।
यह व्यवस्था वर्ष 2025 के पैट से लागू होगी। सभी विभागों को पैट 2025 के नियमों की प्रति भेज दी गई है। इसके बाद शोध से जुड़ी जानकारी को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर सार्वजनिक करने की प्रक्रिया नियमों के अनुसार आगे बढ़ाई जाएगी।
बीआरएबीयू में पैट 2025 और 2026 के आवेदन जारी
बीआरएबीयू में पैट 2025 और 2026 के लिए फिलहाल आवेदन लिए जा रहे हैं। आवेदन की प्रक्रिया 3 अक्टूबर तक चलेगी। नई व्यवस्था के तहत पीएचडी में अब केवल नेट या जेआरएफ उत्तीर्ण छात्र ही आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के बाद पात्र छात्रों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा।
बीआरएबीयू में सबसे अधिक पीएचडी सीटें हिन्दी और इतिहास विषयों में हैं, जबकि जूलॉजी में एक भी सीट नहीं है। नए नियम के अनुसार पीएचडी में नामांकन के लिए नेट के स्कोर को 80 अंक और साक्षात्कार को 20 अंक दिए जाएंगे।
सेवा संपुष्ट शिक्षक ही कराएंगे पीएचडी शोध
विश्वविद्यालय प्रशासन ने शोध निर्देशन को लेकर भी व्यवस्था तय की है। अब वही शिक्षक शोध कराएंगे, जिनकी सेवा संपुष्ट हो चुकी है। सेवा संपुष्ट होने वाले सहायक प्राध्यापक भी शोधार्थियों का मार्गदर्शन कर सकेंगे।
फिलहाल पीएचडी 2023-24 का कोर्स वर्क चल रहा है। वहीं वर्ष 2022 की पीएचडी के शोध प्रस्ताव यानी सिनाप्सिस को पीजीआरसी से मंजूरी मिल चुकी है।
तुलसी-कबीर की रचनाओं में पर्यावरण चेतना पर शोध
बीआरएबीयू में हिन्दी के छात्र तुलसी और कबीर की रचनाओं में पर्यावरण चेतना के तत्वों का अध्ययन करेंगे। यह शोध एलएस कॉलेज के डॉ. शिवेश मौर्य के निर्देशन में किया जा रहा है।
वहीं इतिहास के छात्र भिखारी ठाकुर की रचनाओं में महिलाओं की स्थिति पर शोध करेंगे। हिन्दी विभाग में डॉ. सुशांत के निर्देशन में बज्जिका बोली से जुड़े विषय पर भी शोध कराया जा रहा है।





