सरकार की बचत अपील के बीच बढ़ी पेट्रोल-डीजल की खपत, जुलाई में LPG की मांग भी उछली, सामने आए नए आंकड़े
नई दिल्ली: केंद्र सरकार की ओर से पेट्रोल-डीजल की बचत और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की अपील के बावजूद देश में जुलाई 2026 के दौरान पारंपरिक ईंधनों की मांग मजबूत बनी रही। तेल मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में कुल पेट्रोलियम उत्पादों की खपत बढ़कर 1.992 करोड़ मीट्रिक टन पहुंच गई। यह जून 2026 के मुकाबले करीब 3 प्रतिशत अधिक है और मार्च 2026 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर भी दर्ज किया गया है।
आंकड़ों के अनुसार जून 2026 में कुल पेट्रोलियम उत्पादों की खपत 1.935 करोड़ मीट्रिक टन थी, जबकि जुलाई 2025 की तुलना में भी इस बार लगभग 3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। सरकार लगातार ईंधन की बचत और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है, लेकिन इसके बावजूद पारंपरिक ईंधनों की मांग में कमी नहीं आई।
एलपीजी की मांग में मासिक आधार पर तेज बढ़ोतरी
जुलाई के दौरान रसोई गैस (एलपीजी) की खपत 23.5 लाख मीट्रिक टन रही। यह जून की तुलना में 7.5 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है और मार्च के बाद का सबसे ऊंचा स्तर माना गया है। हालांकि, सालाना आधार पर जुलाई 2025 की तुलना में एलपीजी की खपत करीब 16 प्रतिशत कम दर्ज की गई।
पेट्रोल की बिक्री बढ़ी, डीजल में मिला-जुला रुख
पीपीएसी के आंकड़ों के अनुसार जुलाई में पेट्रोल की बिक्री जून के मुकाबले 0.8 प्रतिशत बढ़ी। वहीं, पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में इसमें 9.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
डीजल की मांग सालाना आधार पर करीब 10 प्रतिशत बढ़ी, लेकिन जून 2026 की तुलना में इसमें लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। मासिक आधार पर यह फरवरी 2026 के बाद का सबसे निचला स्तर रहा।
अमेरिका से बढ़ेगा एलपीजी आयात
भारत ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में भी काम कर रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत वर्ष 2027 तक अपने कुल एलपीजी आयात का लगभग 25 प्रतिशत अमेरिका से खरीदने की योजना बना रहा है। इसका उद्देश्य खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करना और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना है।
रणनीतिक तेल भंडारण क्षमता बढ़ाने की तैयारी
केंद्रीय राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने संसद में बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ओएनजीसी अपनी प्रस्तावित 17.5 लाख मीट्रिक टन, यानी करीब 1.3 करोड़ बैरल क्षमता वाली तेल भंडारण परियोजना का आधा हिस्सा देश की सामरिक जरूरतों के लिए सुरक्षित रखेगी। इससे भविष्य में आपूर्ति संबंधी संकट की स्थिति से निपटने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की स्थिति
जुलाई के दौरान नेफ्था की बिक्री में पिछले वर्ष की तुलना में 13.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, बिटुमेन की खपत सालाना आधार पर 8.5 प्रतिशत बढ़ी, हालांकि जून की तुलना में इसमें करीब 16.9 प्रतिशत की कमी रही।
फ्यूल ऑयल की मांग में जून के मुकाबले 27.6 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसे औद्योगिक गतिविधियों में तेजी का संकेत माना जा रहा है।





