ओमान के तट पर बड़ा पर्यावरणीय संकट! रूसी तेल टैंकर से 150 वर्ग किमी तक फैला रिसाव, दुर्लभ समुद्री जीवों पर खतरा

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नई दिल्ली: ओमान के तट के पास कई सप्ताह से फंसे एक रूसी तेल टैंकर से लगातार हो रहे कच्चे तेल के रिसाव ने गंभीर पर्यावरणीय संकट खड़ा कर दिया है। सैटेलाइट तस्वीरों से पुष्टि हुई है कि समुद्र में फैला तेल अब आसपास के तटीय क्षेत्रों और द्वीपों तक पहुंच गया है। इसके चलते दुर्लभ समुद्री जीवों और संरक्षित समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

150 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला तेल

पर्यावरण संगठनों के अनुसार, शुरुआती दिनों में सीमित दायरे में रहने वाला तेल रिसाव अब तेजी से फैलकर 150 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में पहुंच चुका है। समुद्र की सतह पर फैली कच्चे तेल की परत ओमान के धोफार प्रांत के निकट स्थित किब्लियाह द्वीप के तटीय इलाकों तक पहुंच गई है, जिससे समुद्री पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

जून से फंसा है रूसी तेल टैंकर

रिसाव का स्रोत 274 मीटर लंबा सूएजमैक्स श्रेणी का टैंकर ‘कैरोलिन बेजेंगी’ बताया गया है। यह जहाज रूस का कच्चा तेल लेकर जा रहा था और इसी कारण इस पर ब्रिटेन, यूरोपीय संघ तथा कनाडा की ओर से प्रतिबंध लगाए गए हैं। जून महीने में चालक दल ने जहाज के भीतर विस्फोट होने की सूचना दी थी, जिसके बाद से यह टैंकर ओमान के तट के पास फंसा हुआ है।

संरक्षित समुद्री क्षेत्र पर बढ़ा खतरा

प्रभावित इलाका अरब सागर रिजर्व के अंतर्गत आता है, जिसे संवेदनशील समुद्री संरक्षित क्षेत्र माना जाता है। यहां दुर्लभ अरब सागर हंपबैक व्हेल और संकटग्रस्त पेट्रेल पक्षियों का प्राकृतिक आवास है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से फैलता कच्चा तेल इन प्रजातियों के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

पुराने टैंकरों की सुरक्षा पर उठे सवाल

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, इस टैंकर में लगभग 8 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल मौजूद था। उनका मानना है कि यह घटना पुराने टैंकरों और रूस के शैडो फ्लीट के जरिए पर्याप्त सुरक्षा मानकों के बिना किए जा रहे तेल परिवहन से जुड़े जोखिमों को उजागर करती है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते रिसाव पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो यह पूरे क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक पर्यावरणीय आपदा का रूप ले सकता है।

 

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