मानसून में बच्चों पर फ्लू का बढ़ा खतरा! ये शुरुआती लक्षण दिखें तो तुरंत हों सतर्क, डॉक्टर ने बताए बचाव के आसान उपाय

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नई दिल्ली: मानसून का मौसम अपने साथ कई तरह की वायरल बीमारियां लेकर आता है, जिनका सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों पर देखने को मिलता है। वायरल फीवर, डेंगू और मलेरिया के साथ-साथ इन्फ्लूएंजा यानी फ्लू का खतरा भी इस मौसम में बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे इस संक्रमण की चपेट में जल्दी आ सकते हैं। यह वायरस नाक, गले और फेफड़ों को प्रभावित करता है, जिससे सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है। नोएडा के पीडियाट्रिशियन डॉक्टर सौरभ गुप्ता का कहना है कि समय रहते इलाज शुरू होने पर इन्फ्लूएंजा को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

बच्चों में इन्फ्लूएंजा के शुरुआती लक्षण

इन्फ्लूएंजा की शुरुआत तेज बुखार से हो सकती है। इसके अलावा खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और अत्यधिक थकान भी इसके सामान्य लक्षण हैं। छोटे बच्चों में कई बार उल्टी या दस्त की शिकायत भी देखने को मिल सकती है।

कैसे फैलता है फ्लू?

इन्फ्लूएंजा एक वायरल संक्रमण है, जो संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैलता है। बच्चों में इसका जोखिम अधिक होता है क्योंकि वे स्कूल, डे-केयर और अन्य सामूहिक स्थानों पर एक-दूसरे के संपर्क में रहते हैं। कई बार संक्रमित बच्चे में शुरुआती लक्षण स्पष्ट नहीं होते, लेकिन वह वायरस दूसरों तक पहुंचा सकता है। ऐसे में स्वस्थ बच्चे भी आसानी से इसकी चपेट में आ सकते हैं।

कितने दिनों में ठीक होता है इन्फ्लूएंजा?

अधिकांश बच्चों में इन्फ्लूएंजा 5 से 7 दिनों के भीतर ठीक हो जाता है। इस दौरान बच्चे को पर्याप्त आराम देना और भरपूर पानी व अन्य तरल पदार्थ पिलाना जरूरी है। बुखार या किसी भी अन्य समस्या के लिए डॉक्टर की सलाह के बिना दवा नहीं देनी चाहिए। यदि बच्चे को सांस लेने में कठिनाई हो, होंठ या चेहरा नीला पड़ने लगे, तेज बुखार लंबे समय तक बना रहे या दौरे पड़ने जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

बच्चों को फ्लू से कैसे बचाएं?

फ्लू से बचाव के लिए हर साल फ्लू का टीका लगवाना लाभदायक माना जाता है। बच्चों को नियमित रूप से साबुन से हाथ धोने की आदत डालें। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकने के लिए प्रेरित करें। बीमार व्यक्ति के संपर्क से बचाएं और बारिश में भीगने के बाद तुरंत सूखे कपड़े पहनाएं ताकि संक्रमण का खतरा कम किया जा सके।

 

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