3 मुस्लिम कलाकारों ने मिलकर रचा था कृष्ण भक्ति का अमर भजन, आज भी ‘मन तड़पत हरि दर्शन को’ सुन भाव-विभोर हो जाते हैं श्रद्धालु

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नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे भजन हैं, जो दशकों बाद भी लोगों की आस्था और भावनाओं से जुड़े हुए हैं। इन्हीं में से एक है भगवान कृष्ण को समर्पित भजन ‘मन तड़पत हरि दर्शन को आज’, जिसे आज भी श्रद्धा के साथ सुना जाता है। खास बात यह है कि इस भजन के निर्माण में तीन मुस्लिम कलाकारों की अहम भूमिका रही थी। संगीत, गायन और गीत—तीनों क्षेत्रों में उनके योगदान ने इस रचना को कालजयी बना दिया।

तीन मुस्लिम कलाकारों ने मिलकर रचा था यह भजन

फिल्म बैजू बावरा का लोकप्रिय भजन ‘मन तड़पत हरि दर्शन को आज’ संगीतकार नौशाद ने तैयार किया था। इसे महान गायक मोहम्मद रफी ने अपनी आवाज दी, जबकि इसके बोल गीतकार शकील बदायूंनी ने लिखे थे। तीनों कलाकार मुस्लिम समुदाय से थे, लेकिन उनकी इस रचना ने भगवान कृष्ण की भक्ति को इतनी प्रभावशाली अभिव्यक्ति दी कि यह भजन आज भी बेहद लोकप्रिय है।

रिकॉर्डिंग से पहले बताई जाती है एक दिलचस्प घटना

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, संगीतकार नौशाद ने इस भजन की रिकॉर्डिंग से पहले पूरी टीम से स्वच्छ होकर आने के लिए कहा था। यह भी कहा जाता है कि रिकॉर्डिंग के दौरान प्रोडक्शन टीम के सदस्य लल्लू भाई भक्ति भाव में इतने डूब गए कि वहीं झूमने लगे। इस घटना को लेकर कई चर्चित किस्से आज भी सुनाए जाते हैं, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

‘बैजू बावरा’ से मिला था नौशाद को फिल्मफेयर सम्मान

बताया जाता है कि बैजू बावरा के संगीत के लिए नौशाद को अपने करियर का पहला और एकमात्र फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था। यह भी माना जाता है कि इस फिल्म के जरिए हिंदी सिनेमा के संगीत में शास्त्रीय शैली को नई पहचान मिली।

100 सप्ताह तक सिनेमाघरों में चली थी फिल्म

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, बैजू बावरा में भरत भूषण और मीना कुमारी ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और लंबे समय तक सिनेमाघरों में प्रदर्शित होती रही। इसे उस दौर की यादगार संगीतमय फिल्मों में गिना जाता है।

दिलीप कुमार और नरगिस थे पहली पसंद

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि फिल्म के लिए शुरुआती तौर पर दिलीप कुमार और नरगिस पर विचार किया गया था। हालांकि बाद में बजट और तारीखों से जुड़ी वजहों के चलते विजय भट्ट ने भरत भूषण और मीना कुमारी को मुख्य भूमिकाओं में चुना।

फिल्म बनने से जुड़ा एक और चर्चित किस्सा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म निर्माण से पहले प्रोडक्शन हाउस आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहा था। इसी दौरान नौशाद ने निर्माताओं को एक और अवसर देने की सलाह दी और बैजू बावरा की कहानी पर काम करने का सुझाव दिया। बाद में यही फिल्म हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित संगीतमय फिल्मों में शामिल हो गई।

 

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