यूपी के 6 एयरपोर्ट पर थमी उड़ानें, जेवर-हिंडन से भी घटी फ्लाइट्स; अब सरकार ने बनाया नया प्लान
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में हवाई संपर्क को मजबूत करने के लिए विकसित किए गए कई एयरपोर्ट अपेक्षित यात्री नहीं मिलने के कारण प्रभावित हो रहे हैं। कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट समेत राज्य के छह हवाई अड्डों से उड़ान सेवाएं बंद हैं। वहीं नोएडा के जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट और गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट से भी उड़ानों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। केंद्र सरकार ने इस स्थिति के बीच संशोधित उड़ान योजना लागू कर अगले 10 वर्षों के लिए नई रणनीति तैयार की है।
केंद्र सरकार क्षेत्रीय संपर्क योजना ‘उड़ान’ के जरिए छोटे शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने पर लगातार काम कर रही है। सरकार के अनुसार 10 जुलाई तक देशभर में इस योजना के तहत 679 हवाई मार्ग शुरू किए गए, लेकिन इनमें से केवल 348 मार्ग ही नियमित रूप से संचालित हो रहे हैं। वहीं 165 मार्ग वायबिलिटी गैप फंडिंग की अवधि पूरी होने से पहले ही बंद करने पड़े। इसके पीछे प्रमुख वजह पर्याप्त संख्या में यात्रियों का नहीं मिलना और हवाई टिकटों की अधिक कीमत बताई गई है।
कुशीनगर समेत छह एयरपोर्ट से नहीं हो रहीं उड़ानें
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश में उड़ान योजना के तहत 18 एयरपोर्ट चिन्हित किए गए थे। हालांकि इनमें से छह हवाई अड्डों से फिलहाल कोई उड़ान संचालित नहीं हो रही है। इनमें कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, आजमगढ़, अलीगढ़, चित्रकूट, श्रावस्ती और मुरादाबाद शामिल हैं।
कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पिछले वर्ष कोई उड़ान संचालित नहीं हुई थी और इस वर्ष भी स्थिति में बदलाव नहीं आया है। जबकि इस एयरपोर्ट के विस्तार पर 108.22 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।
हिंडन और जेवर एयरपोर्ट पर भी कम हुई उड़ानों की संख्या
जिन एयरपोर्ट से उड़ान सेवाएं जारी हैं, वहां भी कई रूटों पर उड़ानों की संख्या घट रही है। गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट से प्रतिदिन संचालित होने वाली उड़ानों की संख्या लगभग आधी रह गई है। इसी तरह पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के पंतनगर हवाई अड्डे से भी अधिकांश उड़ानें बंद बताई गई हैं।
नोएडा के जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से पहले 17 शहरों के लिए उड़ानें संचालित होती थीं, लेकिन अब यह संख्या घटकर 15 रह गई है। वहीं प्रतिदिन उड़ानों की संख्या भी 36 से घटकर लगभग 28 से 30 के बीच पहुंच गई है।
क्यों घट रही हैं उड़ान सेवाएं
सरकार के अनुसार छोटे हवाई अड्डों पर विमान ईंधन भरने की सुविधा उपलब्ध नहीं होना बड़ी चुनौती है। ऐसे में विमानों को बड़े एयरपोर्ट से ईंधन भरकर उड़ान भरनी पड़ती है, जिससे परिचालन लागत बढ़ जाती है। इसके अलावा कई रूटों पर यात्रियों की संख्या सीटों के अनुपात में कम है। महंगे हवाई टिकट और एयरपोर्ट तक पर्याप्त सड़क संपर्क की कमी भी उड़ान संचालन को प्रभावित कर रही है।
संशोधित उड़ान योजना के तहत नई तैयारी
सरकार ने बताया कि 4 जुलाई 2026 से संशोधित उड़ान योजना लागू कर दी गई है। इस योजना का लक्ष्य अगले 10 वर्षों में 120 नए अविकसित और कम सेवा वाले गंतव्यों को हवाई नेटवर्क से जोड़ना तथा 4 करोड़ यात्रियों को सस्ती हवाई यात्रा उपलब्ध कराना है। इसके लिए राज्यों द्वारा नामित हवाई अड्डों के विकास में चैलेंज मोड व्यवस्था अपनाई जाएगी।
मुरादाबाद से फिर शुरू होगी उड़ान सेवा
सरकार के मुताबिक मुरादाबाद-लखनऊ मार्ग का संचालन करने वाली एयरलाइन फ्लाइबिग ने अनुबंध संबंधी अधिकार और जिम्मेदारी स्काईहॉप कंपनी को सौंप दी है। अब स्काईहॉप मुरादाबाद से लखनऊ के लिए उड़ान सेवा शुरू करेगी। इसके अलावा मुरादाबाद को कानपुर, हिंडन, सहारनपुर और देहरादून से जोड़ने के लिए भी उड़ानों का संचालन किया जाएगा।





