ग्लोबल चिप इंडस्ट्री में भारत की बड़ी छलांग! 1.27 लाख करोड़ के ‘सेमीकॉन 2.0 मिशन’ को कैबिनेट की मंजूरी

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 नई दिल्ली। भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर और हाई-टेक विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 को मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी मिशन के लिए सरकार ने 1.27 लाख करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया है। इसका उद्देश्य देश में चिप डिजाइन, निर्माण और संपूर्ण सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत बनाकर भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में अहम स्थान दिलाना है।

1.27 लाख करोड़ रुपये का बड़ा निवेश

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके साथ ही मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) के लिए 62,500 करोड़ रुपये के बजट को भी स्वीकृति दी गई है।

सरकार का कहना है कि यह पहल भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को नई गति देगी और वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में देश की भागीदारी को मजबूत करेगी।

कैबिनेट के सात बड़े फैसलों में शामिल रहा मिशन

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट और आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की बैठक में कुल सात महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। इनमें से तीसरा, चौथा और पांचवां निर्णय सेमीकॉन 2.0 मिशन से जुड़े हैं।

उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर आज मोबाइल फोन, कंप्यूटर, ऑटोमोबाइल, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, रक्षा प्रणाली, रेलवे और आधुनिक औद्योगिक तकनीक का आधार बन चुके हैं। ऐसे में देश में मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करना रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

2.19 लाख करोड़ रुपये के पैकेज का हिस्सा

सरकार द्वारा घोषित यह मिशन लगभग 2.19 लाख करोड़ रुपये के व्यापक विकास पैकेज का हिस्सा है। इस पैकेज में वाराणसी के दो बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर, यूरिया-2026 राष्ट्रीय निवेश नीति, पारादीप-हरिदासपुर रेल लाइन के दोहरीकरण और डांगोपोसी-राजखरसावां के बीच चौथी रेल लाइन जैसी परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है।

सरकार का लक्ष्य इन परियोजनाओं के माध्यम से देश में बुनियादी ढांचे, विनिर्माण क्षमता और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को नई मजबूती देना है।

भारत को मिलेगा वैश्विक चिप हब बनने का मौका

विशेषज्ञों का मानना है कि ISM 2.0 के जरिए भारत चिप डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के क्षेत्र में अपनी क्षमता को तेजी से बढ़ा सकेगा। इससे विदेशी निवेश आकर्षित होने, रोजगार के नए अवसर बनने और देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

 

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