खरीफ फसलों की बुआई घटी, दाल-चावल और खाद्य तेल हो सकते हैं महंगे; मानसून ने बढ़ाई महंगाई की चिंता
नई दिल्ली: खरीफ सीजन की प्रमुख फसलों की बुआई में आई गिरावट का असर अब खाद्य बाजार पर दिखाई देने लगा है। धान, दालों और तिलहन की कम बुआई के चलते आने वाले महीनों में चावल, दाल और खाद्य तेलों की कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मानसून की स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो खाद्य महंगाई आम उपभोक्ताओं की रसोई का बजट और बढ़ा सकती है।
जून महीने में चावल की महंगाई दर बढ़कर 1.72 प्रतिशत पहुंच गई, जबकि मई में यह 0.23 प्रतिशत थी। इसके पीछे धान की बुआई में आई कमी को प्रमुख वजह माना जा रहा है। 10 जुलाई तक धान का रकबा पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 8.63 प्रतिशत कम दर्ज किया गया है।
दालों की बुआई में बड़ी गिरावट
दालों की खेती भी इस बार प्रभावित हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार तूर (अरहर) की बुआई में 30.29 प्रतिशत, उड़द में 29.71 प्रतिशत और मूंग में 10.62 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
इसका असर महंगाई के आंकड़ों में भी दिखने लगा है। जून में तूर की महंगाई दर बढ़कर 0.85 प्रतिशत हो गई, जो मई में -1.77 प्रतिशत थी। वहीं उड़द की महंगाई दर 0.89 प्रतिशत से बढ़कर 2.16 प्रतिशत और मूंग की 1.15 प्रतिशत से बढ़कर 1.71 प्रतिशत पहुंच गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्पादन प्रभावित हुआ तो आने वाले समय में दालों की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ सकता है।
खाद्य तेलों की कीमतों पर भी बढ़ा दबाव
तिलहन फसलों की बुआई में भी 21.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके चलते सरसों, सोयाबीन और सूरजमुखी जैसे खाद्य तेलों की कीमतों पर दबाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा ज्वार और रागी जैसे मोटे अनाज भी महंगे होने लगे हैं।
कमजोर मानसून बना बड़ी वजह
अर्थशास्त्रियों के अनुसार दालें मौसमी फसल हैं, इसलिए बुआई में देरी या रकबे में कमी का सीधा असर भविष्य की आपूर्ति पर पड़ता है। ऐसी स्थिति में व्यापारी बेहतर कीमतों की उम्मीद में स्टॉक रोककर रखते हैं, जिससे बाजार में उपलब्धता घटती है और कीमतों में तेजी आ सकती है।
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष जून में औसतन करीब 40 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई, जिससे खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हुई। विभाग के मुताबिक देश के 44 प्रतिशत से अधिक जिलों में अब भी सामान्य से कम वर्षा हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून में जल्द सुधार नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में खाद्य महंगाई और बढ़ सकती है।





