भारत की बड़ी तकनीकी छलांग! स्वदेशी ‘गगन’ सिस्टम से पहली बार जेट विमान की सफल लैंडिंग, विमानन क्षेत्र में रचा इतिहास

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नई दिल्ली: भारत ने विमानन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। पहली बार किसी जेट इंजन वाले विमान की सफल लैंडिंग पूरी तरह स्वदेशी सैटेलाइट आधारित ‘गगन’ नेविगेशन प्रणाली की मदद से कराई गई है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय की निगरानी में उदयपुर हवाई अड्डे पर इंडिगो के एयरबस ए320 विमान ने इस तकनीक का उपयोग करते हुए सुरक्षित लैंडिंग की, जिसे भारतीय विमानन इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

उदयपुर एयरपोर्ट पर हुआ सफल परीक्षण

जानकारी के अनुसार, इंडिगो के एयरबस ए320 विमान ने इसरो और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा संयुक्त रूप से विकसित ‘गगन’ प्रणाली का उपयोग करते हुए उदयपुर हवाई अड्डे पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की। यह पहली बार है जब किसी जेट विमान ने इस स्वदेशी तकनीक के जरिए सुरक्षित अवतरण किया है।

छोटे हवाई अड्डों के लिए गेम चेंजर साबित होगी तकनीक

विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि उन हवाई अड्डों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जहां पारंपरिक इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे एयरपोर्ट्स पर गगन प्रणाली सुरक्षित और सटीक लैंडिंग सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा सकती है। इससे देश के दूरदराज और छोटे हवाई अड्डों की संचालन क्षमता भी बेहतर होगी।

भारत बना चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल

गगन प्रणाली के सफल उपयोग के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास अपनी स्वदेशी सैटेलाइट आधारित ऑगमेंटेशन नेविगेशन प्रणाली मौजूद है। यह तकनीक विमानों को उन्नत लैंडिंग सुविधा प्रदान करती है और खराब मौसम या चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी सुरक्षित संचालन में मदद करती है।

एलपीवी तकनीक से मिली सटीक लैंडिंग क्षमता

इस उपलब्धि के दौरान विमान ने वर्टिकल गाइडेंस के साथ एलपीवी अप्रोच प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया। विमानन विशेषज्ञ इसे सैटेलाइट आधारित विमान संचालन और सुरक्षित लैंडिंग तकनीक के क्षेत्र में भारत की बड़ी सफलता मान रहे हैं। इससे भविष्य में विमान संचालन अधिक सटीक, सुरक्षित और आधुनिक बन सकेगा।

इंडिगो लगातार बढ़ा रही तकनीकी क्षमता

इंडिगो ने वर्ष 2022 में अपने एटीआर विमानों के बेड़े में एलपीवी आधारित संचालन की शुरुआत की थी। अब एयरलाइन चरणबद्ध तरीके से अपने अन्य विमानों में भी इस तकनीक का विस्तार कर रही है। इसका उद्देश्य देशभर के अधिक से अधिक हवाई अड्डों पर आधुनिक सैटेलाइट आधारित लैंडिंग सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिला नया बल

विशेषज्ञों का कहना है कि गगन प्रणाली की यह सफलता न केवल भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी नई मजबूती प्रदान करती है। स्वदेशी तकनीक के जरिए हासिल यह सफलता भविष्य में भारत को वैश्विक विमानन तकनीक के क्षेत्र में और मजबूत पहचान दिला सकती है।

 

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