ईरान का बड़ा ऐलान: होर्मुज जलडमरूमध्य फिर बंद करने की घोषणा, अंतिम समय में भारतीय LNG जहाज सुरक्षित निकला
तेहरान: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को एक बार फिर जहाजों की आवाजाही के लिए बंद करने की घोषणा कर दी है। इस फैसले से वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है। हालांकि भारत के लिए राहत की खबर यह रही कि घोषणा से ठीक पहले एक भारतीय गंतव्य की ओर बढ़ रहा एलएनजी जहाज सुरक्षित रूप से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को पार कर गया।
अल हामरा नाम का यह जहाज तरलीकृत प्राकृतिक गैस लेकर भारत आ रहा है। इसके सुरक्षित निकलने के साथ ही हाल के दिनों में होर्मुज पार कर भारत की ओर रवाना होने वाले प्रमुख जहाजों की संख्या चार हो गई है।
भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिए क्यों अहम है अल हामरा?
अल हामरा जहाज तमिलनाडु के चेन्नई के निकट स्थित एन्नोर एलएनजी टर्मिनल की ओर बढ़ रहा है। यह टर्मिनल दक्षिण भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार जहाज मध्य पूर्व की खाड़ी को सफलतापूर्वक पार कर चुका है और अब भारतीय तट की ओर बढ़ रहा है। एलएनजी का उपयोग बिजली उत्पादन, उर्वरक उद्योग और कई अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयातित प्राकृतिक गैस और एलएनजी पर काफी हद तक निर्भर है।
एन्नोर टर्मिनल के आसपास कई उर्वरक इकाइयां और बिजली संयंत्र संचालित होते हैं, जिनकी आपूर्ति के लिए एलएनजी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
1.32 लाख क्यूबिक मीटर LNG लेकर निकला जहाज
जानकारी के अनुसार अल हामरा अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी से एलएनजी लेकर रवाना हुआ था। जहाज में करीब 1 लाख 32 हजार 890 क्यूबिक मीटर एलएनजी लदी हुई है।
बताया जा रहा है कि ईरान की घोषणा से पहले कुल 55 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने में सफल रहे, जिनमें अल हामरा भी शामिल था। रिपोर्टों के मुताबिक इन जहाजों में कुल मिलाकर लगभग 17 मिलियन बैरल कच्चा तेल और ऊर्जा उत्पाद लदे हुए थे।
सुरक्षा कारणों से अल हामरा ने यात्रा के दौरान अपनी ट्रैकिंग प्रणाली भी बंद कर दी थी, जो संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में कई जहाजों द्वारा अपनाई जाने वाली सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है।
भारत के लिए अबू धाबी और कतर दोनों अहम
भारत अपनी कुल एलएनजी जरूरतों का लगभग 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा अबू धाबी से आयात करता है। वहीं कतर भारत का सबसे बड़ा एलएनजी आपूर्तिकर्ता बना हुआ है, जहां से देश को करीब 40 से 45 प्रतिशत गैस आपूर्ति प्राप्त होती है।
ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की बाधा भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आयात व्यवस्था पर असर डाल सकती है।
94 भारतीयों के साथ तीन तेल टैंकर भी निकले
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने जानकारी दी कि भारत के ध्वज वाले तीन कच्चे तेल टैंकर भी सफलतापूर्वक होर्मुज पार कर भारत की ओर रवाना हो चुके हैं।
‘देश वैभव’, ‘देश विभोर’ और ‘सनमार हेराल्ड’ नामक इन जहाजों में 94 भारतीय चालक दल के सदस्य मौजूद हैं। तीनों टैंकरों में कुल 8.6 लाख टन से अधिक कच्चा तेल लदा हुआ है।
जानकारी के मुताबिक ‘देश वैभव’ और ‘देश विभोर’ 24 जून को क्रमशः वाडीनार और सिक्का बंदरगाह पहुंच सकते हैं, जबकि ‘सनमार हेराल्ड’ के 1 जुलाई तक पारादीप पहुंचने की संभावना है।
ईरान ने क्यों लिया यह फैसला?
ईरानी सैन्य प्रतिष्ठान से जुड़े खातम-अल अंबिया केंद्रीय मुख्यालय ने एक बयान जारी कर कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों की आवाजाही के लिए बंद किया जा रहा है। बयान में इसे विरोधी पक्षों द्वारा कथित वादाखिलाफी के जवाब में उठाया गया कदम बताया गया।
ईरान ने यह भी संकेत दिया कि यदि क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई और तनाव जारी रहता है तो आगे और कदम उठाए जा सकते हैं।
अमेरिका-ईरान वार्ता पर टिकी दुनिया की नजर
इस बीच पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के प्रयास भी जारी हैं। अमेरिका और ईरान के शीर्ष प्रतिनिधियों के बीच स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में महत्वपूर्ण वार्ता शुरू हुई है।
करीब 10 सप्ताह बाद दोनों देशों के प्रतिनिधि आमने-सामने बातचीत कर रहे हैं। हालांकि शुरुआती दौर की चर्चाओं के बाद वार्ता में कुछ ठहराव की खबरें सामने आई हैं, लेकिन कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि बैकचैनल संपर्क जारी हैं और दोनों पक्षों को फिर से सहमति की दिशा में लाने की कोशिशें चल रही हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव न केवल वैश्विक तेल बाजार बल्कि भारत सहित कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर भी सीधा प्रभाव डाल सकता है।





