बांग्लादेश चुनाव को लेकर जमात-ए-इस्लामी का घोषणापत्र जारी, भारत सहित वैश्विक साख बढ़ाने का किया वादा
नई दिल्ली : बांग्लादेश में राष्ट्रीय चुनावों में अब सिर्फ कुछ ही दिन बचे हैं। इसी बीच इस्लामिक कंजर्वेटिव पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने बुधवार को अपना चुनावी घोषणापत्र जारी किया। घोषणापत्र में पार्टी ने भारत सहित पड़ोसी देशों के साथ रचनात्मक और सहयोगात्मक रिश्ते बनाए रखने का वादा किया है। पार्टी का कहना है कि ये संबंध आपसी सम्मान और निष्पक्षता के आधार पर होंगे।
घोषणापत्र में कहा गया है कि भारत, भूटान, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका, मालदीव और थाइलैंड के साथ शांतिपूर्ण, मित्रतापूर्ण और सहयोगी संबंध स्थापित किए जाएंगे। पार्टी ने जोर दिया कि क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और साझा समृद्धि के लिए पड़ोसियों के साथ संवाद और सहयोग को प्राथमिकता दी जाएगी।
जमात-ए-इस्लामी के घोषणापत्र में बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय छवि और उसके पासपोर्ट की वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ाने का भी वादा किया गया है। इसमें कहा गया है कि देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को मजबूत करने के साथ-साथ ऐसे ठोस कदम उठाए जाएंगे, जिनसे बांग्लादेशी पासपोर्ट की विश्वसनीयता और अंतरराष्ट्रीय यात्रा की सुविधा में इजाफा हो सके।
घोषणापत्र के मुताबिक, मुस्लिम देशों के साथ संबंधों को मजबूत करना पार्टी की विदेश नीति की एक प्रमुख प्राथमिकता होगी। इसके साथ ही पूर्वी यूरोप, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के देशों के साथ कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों के विस्तार पर भी जोर दिया गया है।
पार्टी ने संयुक्त राष्ट्र और उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय संगठनों में बांग्लादेश की सक्रिय भागीदारी को और मजबूत करने की बात कही है। घोषणापत्र में शांति, सुरक्षा, मानवाधिकार और आर्थिक विकास जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में संयुक्त राष्ट्र के मंच पर सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प दोहराया गया है।

जमात-ए-इस्लामी ने रोहिंग्या संकट के समाधान को भी अपने एजेंडे में शामिल किया है। पार्टी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सहयोग से रोहिंग्या शरणार्थियों की सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वैच्छिक वापसी के लिए प्रयास किए जाएंगे। साथ ही संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में बांग्लादेश की भागीदारी जारी रखने का भी वादा किया गया है।
यह घोषणापत्र ऐसे समय सामने आया है जब देश में 12 फरवरी को बहुप्रतीक्षित राष्ट्रीय चुनाव और संवैधानिक जनमत संग्रह होने जा रहा है। इन चुनावों में सत्तारूढ़ आवामी लीग को भाग लेने से बैन कर दिया गया है। इसके चलते बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात-ए-इस्लामी प्रमुख पार्टियां हैं। मौजूदा चुनावी हालात को देश के इतिहास के एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। जुलाई 2024 में हुए ‘जुलाई जनआंदोलन’ के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटना पड़ा था। उसके बाद से राजनीतिक परिदृश्य में बड़े बदलाव आए हैं, जिससे चुनाव परिणाम का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है।
इस बीच, इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप ने भी चुनावों को लेकर अनिश्चितता जताई है। संगठन ने चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता, संभावित हिंसा और राजनीतिक तनाव को लेकर चिंता व्यक्त की है। कुल मिलाकर, 12 फरवरी को होने वाले चुनाव बांग्लादेश के भविष्य की दिशा तय करने वाले माने जा रहे हैं। जमात-ए-इस्लामी का यह घोषणापत्र ऐसे समय में आया है जब देश के भीतर और बाहर, दोनों जगह, बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिरता और विदेश नीति को लेकर कड़ी निगाहें टिकी हुई हैं।

