क्या UPI ट्रांजैक्शन पर जल्द ही लगेगा चार्ज? फिनटेक कंपनियों ने MDR लागू करने का समर्थन किया

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नई दिल्ली। भारत में UPI आज डिजिटल भुगतान की रीढ़ बन चुका है। सब्जी वाले से लेकर मॉल तक, हर जगह QR कोड से पेमेंट आम हो गया है। लेकिन अब फिनटेक कंपनियों की चिंता बढ़ गई है कि बिना टिकाऊ मॉडल के यह मुफ्त सिस्टम लंबे समय तक चलना मुश्किल हो सकता है। PhonePe समेत कई कंपनियों का कहना है कि अगर कमाई का स्थायी तरीका नहीं मिला, तो UPI इकोसिस्टम लंबे समय तक टिक नहीं पाएगा।

UPI नेटवर्क चलाने में भारी खर्च

PhonePe के मुताबिक, UPI नेटवर्क को संचालित करने में टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्वर, साइबर सिक्योरिटी, फ्रॉड प्रिवेंशन, कस्टमर सपोर्ट और नए यूजर्स व दुकानदारों को जोड़ने जैसे कामों में हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं। FY23-24 में सरकार से 3,900 करोड़ रुपये का इंसेंटिव मिला, लेकिन यह खर्चों की तुलना में कम था। FY24-25 में यह घटकर 1,500 करोड़ रुपये रह गया और मौजूदा बजट में सिर्फ 427 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

UPI का फायदा, लेकिन लागत भी है

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि UPI ने देश को बहुत फायदा दिया है, लेकिन इसकी लागत किसी न किसी को उठानी होगी। उनका साफ कहना है कि UPI हमेशा फ्री नहीं रह सकता। Payments Council of India (PCI) ने भी चेतावनी दी है कि मौजूदा मॉडल कंपनियों के लिए टिकाऊ नहीं है। संगठन का कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो कई फिनटेक कंपनियों को अपने ऑपरेशन सीमित करने पड़ सकते हैं, खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों में।

रिकॉर्ड स्तर पर UPI ट्रांजैक्शन

दिलचस्प बात यह है कि UPI का इस्तेमाल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। NPCI के आंकड़ों के अनुसार, केवल अक्टूबर महीने में 20.7 अरब UPI ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू 27.28 लाख करोड़ रुपये रही। देश में होने वाले लगभग 85% डिजिटल पेमेंट अब UPI से होते हैं। टियर-2 और टियर-3 शहरों में इसका दायरा तेजी से बढ़ा है।

फिनटेक कंपनियों की मांग

इसी बीच कंपनियां सरकार से मांग कर रही हैं कि या तो सब्सिडी बढ़ाई जाए या फिर Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने की अनुमति दी जाए। प्रस्ताव यह है कि छोटे दुकानदार और आम यूजर्स के लिए UPI फ्री रहे, लेकिन बड़े मर्चेंट (सालाना टर्नओवर 10 करोड़ रुपये से अधिक) से 0.25% से 0.30% तक मामूली MDR लिया जाए। कंपनियों का तर्क है कि इससे आम जनता पर बोझ नहीं पड़ेगा, लेकिन सिस्टम टिकाऊ बनेगा।

भविष्य की दिशा

बजट 2026 से पहले यह मुद्दा गरमाता जा रहा है। सवाल यह है कि जो सिस्टम आज करोड़ों लोगों की सुविधा बना है, क्या वह भविष्य में भी पूरी तरह फ्री रह पाएगा या फिर UPI के लिए भी सस्टेनेबल मॉडल लागू करना जरूरी हो गया है।