दिल की बीमारी की सही जांच है एंजियोग्राफी, जानिए क्यों जरूरी है यह टेस्ट और क्या रखनी होती हैं सावधानियां
नई दिल्ली। हमारा दिल बिना रुके लगातार काम करता है और पूरे शरीर में खून पहुंचाकर हमें जीवित रखता है। जब दिल स्वस्थ रहता है तो शरीर भी ठीक तरह से काम करता है, लेकिन दिल से जुड़ी छोटी सी गड़बड़ी भी पूरे स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है। इसी वजह से दिल की बीमारियों का समय रहते पता लगाना बेहद जरूरी माना जाता है। आजकल डॉक्टर दिल की समस्याओं के शक में अक्सर एंजियोग्राफी कराने की सलाह देते हैं, लेकिन बहुत से लोग अब भी नहीं जानते कि यह टेस्ट क्या होता है, कैसे किया जाता है और इसके बाद किन बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है।
क्या है एंजियोग्राफी और क्यों कराई जाती है
एंजियोग्राफी एक विशेष जांच प्रक्रिया है, जिससे यह पता लगाया जाता है कि शरीर की नसें और धमनियां ठीक से काम कर रही हैं या नहीं। खासतौर पर दिल, दिमाग या हाथ-पैर की नसों में अगर कहीं रुकावट या ब्लॉकेज हो रही हो, तो एंजियोग्राफी से उसकी सही स्थिति सामने आ जाती है। जब किसी व्यक्ति को सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, घबराहट या असामान्य बेचैनी महसूस होती है, तो डॉक्टर इस टेस्ट की सलाह देते हैं। यह जांच यह समझने का आसान तरीका है कि खून शरीर में सही तरह से बह रहा है या कहीं रुकावट आ रही है।
एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी में क्या है फर्क
अक्सर लोग एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी को एक ही प्रक्रिया समझ लेते हैं, जबकि दोनों में अंतर है। एंजियोग्राफी केवल जांच का तरीका है, जिससे यह पता चलता है कि नसों या धमनियों में ब्लॉकेज है या नहीं। वहीं एंजियोप्लास्टी इलाज की प्रक्रिया है, जिसमें उस ब्लॉकेज को हटाया जाता है या स्टेंट लगाया जाता है। यानी पहले एंजियोग्राफी से समस्या की पहचान होती है और फिर जरूरत पड़ने पर एंजियोप्लास्टी की जाती है।
कैसे की जाती है एंजियोग्राफी की प्रक्रिया

एंजियोग्राफी के दौरान डॉक्टर सबसे पहले उस हिस्से की नस में एक पतली ट्यूब डालते हैं, जिसे कैथेटर कहा जाता है। यह ट्यूब आमतौर पर पैर या हाथ की नस के जरिए डाली जाती है। इसके बाद कैथेटर के माध्यम से एक विशेष रंगीन द्रव्य नसों में भेजा जाता है। जब यह द्रव्य नसों में आगे बढ़ता है, तो एक्स-रे मशीन उसकी तस्वीरें लेती है। इन तस्वीरों की मदद से डॉक्टर साफ देख पाते हैं कि खून का प्रवाह सही है या कहीं रुकावट मौजूद है। यह प्रक्रिया आमतौर पर लगभग एक घंटे में पूरी हो जाती है। जांच के बाद कैथेटर निकाल दिया जाता है और जिस जगह से ट्यूब डाली गई थी, उसे सुरक्षित रूप से बंद कर दिया जाता है। इसके बाद मरीज को कुछ समय आराम करने की सलाह दी जाती है।
ब्लॉकेज मिलने पर क्या बरतनी होती हैं सावधानियां
अगर एंजियोग्राफी में नसों में ब्लॉकेज पाया जाता है, तो आगे एंजियोप्लास्टी या स्टेंट लगाने की जरूरत पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में मरीज को कुछ खास सावधानियां अपनानी होती हैं। भारी वजन उठाने से बचना, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाना और डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयों को नियमित रूप से लेना बेहद जरूरी होता है। इसके साथ ही खान-पान में सुधार करना भी दिल की सेहत के लिए अहम माना जाता है।
दिल को स्वस्थ रखने के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव जरूरी
एंजियोग्राफी के बाद और दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए हल्की एक्सरसाइज, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाती है। फल-सब्जियों का सेवन बढ़ाना, हेल्दी तेल का इस्तेमाल करना और नमक व चीनी की मात्रा कम करना दिल के लिए फायदेमंद होता है। डॉक्टरों का मानना है कि समय पर जांच और सही जीवनशैली अपनाकर दिल की गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।

