करेले के फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान! शुगर से लेकर पाचन तक, सेहत के लिए किसी प्राकृतिक औषधि से कम नहीं यह सब्जी
नई दिल्ली: स्वाद में बेहद कड़वा होने के कारण कई लोग करेला खाना पसंद नहीं करते, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह सब्जी शरीर के लिए कई मायनों में बेहद लाभकारी मानी जाती है। पेट से लेकर दिमाग तक शरीर के विभिन्न अंगों को स्वस्थ रखने में करेला मददगार माना जाता है। इसमें एंटीबायोटिक और एंटीवायरल गुण मौजूद होते हैं। साथ ही इसमें पाया जाने वाला विटामिन-सी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक माना जाता है।
करेले की पहचान और विशेषताएं
करेले का वैज्ञानिक नाम मोर्डिका है और इसे अंग्रेजी में बिटर गॉर्ड कहा जाता है। इसका पौधा बेल के रूप में बढ़ता है और हरे रंग का होता है। स्वाद में अत्यधिक कड़वा होने के कारण कई लोग इसे खाने से बचते हैं। हालांकि इसके कड़वेपन को कम करने के लिए आमतौर पर नमक का इस्तेमाल किया जाता है। करेला मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। बड़ा करेला गर्मियों के मौसम में जबकि छोटा करेला बारिश के मौसम में अधिक मिलता है। अच्छी सब्जी होने के साथ-साथ इसमें कई औषधीय गुण भी पाए जाते हैं।
करेले के औषधीय गुण
स्मॉल पॉक्स, चिकन पॉक्स और खसरे जैसी बीमारियों में करेले को उबालकर रोगी को देना लाभकारी माना जाता है।
शुगर के मरीजों के लिए करेला बेहद उपयोगी माना जाता है। बिना कड़वापन निकाले इसकी सब्जी, पत्तों या कच्चे करेले का रस गर्मियों के दौरान नियमित रूप से सुबह-शाम लेने पर रक्त में शर्करा का स्तर कम होने की बात कही जाती है।
करेले का सेवन त्वचा की चमक बढ़ाने में मददगार माना जाता है। साथ ही फोड़े-फुंसियों की समस्या से राहत दिलाने में भी इसे उपयोगी बताया गया है।
यह मल त्याग को आसान बनाने में मदद करता है और मूत्र मार्ग को साफ रखने में भी सहायक माना जाता है।
करेले में मौजूद विटामिन-ए आंखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करता है। वहीं रतौंधी जैसी समस्या में इसके पत्तों का सेवन काली मिर्च के साथ करने को लाभकारी बताया गया है।
इसमें मौजूद विटामिन-सी शरीर की नमी बनाए रखने में सहायक माना जाता है।
करेले का सेवन कब्ज की समस्या से राहत दिलाने में मददगार माना जाता है। साथ ही यह एसिडिटी, छाती में जलन और खट्टी डकार जैसी परेशानियों में भी लाभ पहुंचाने वाला बताया जाता है।
मलेरिया और पीलिया से पीड़ित व्यक्ति के लिए करेले के पत्तों या कच्चे करेले को पीसकर पानी में मिलाकर दिन में कम से कम तीन बार देना लाभकारी माना गया है।
दर्द और गठिया की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए दिन में तीन बार करेले की सब्जी का सेवन फायदेमंद बताया गया है।
बवासीर की शिकायत होने पर करेले को पीसकर प्रभावित स्थान पर हल्के हाथों से लेप लगाने की सलाह दी जाती है। वहीं खूनी बवासीर में एक चम्मच करेले के रस में शक्कर मिलाकर पीना लाभकारी माना गया है।
करेला शरीर में मौजूद विषैले तत्वों और अतिरिक्त वसा को बाहर निकालने में सहायक माना जाता है, जिससे मोटापा नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।
यदि शरीर के किसी हिस्से में जलन हो तो वहां करेले के पत्तों का रस लगाने से राहत मिलने की बात कही गई है।
करेले का रस पेट के कीड़ों को दूर करने में भी लाभदायक माना जाता है। वहीं इसमें मौजूद लौह तत्व खून की कमी यानी एनीमिया को दूर करने में सहायक बताया गया है। आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार करेले का रस वात, पित्त और कफ तीनों दोषों को संतुलित करने में भी मदद करता है।





