2030 से पहले चांद पर उतरेगा चीन! तीन अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने की तैयारी, दो रॉकेट से पूरा होगा मिशन
दो रॉकेट से पूरा होगा चंद्र अभियान
चीन की योजना के मुताबिक, मिशन में दो अलग-अलग रॉकेट भेजे जाएंगे। पहले लॉन्ग मार्च-10 रॉकेट के जरिए लान्यू लैंडर को चंद्रमा की कक्षा में पहुंचाया जाएगा। इसके बाद दूसरा रॉकेट मेंग्झोउ अंतरिक्ष यान को लेकर रवाना होगा, जिसमें तीन अंतरिक्ष यात्री सवार होंगे।
चंद्रमा की कक्षा में पहुंचने के बाद दोनों अंतरिक्ष यान आपस में जुड़ेंगे। इसके बाद तीन सदस्यीय दल में से दो अंतरिक्ष यात्री लैंडर में सवार होकर चंद्रमा की सतह पर उतरेंगे, जबकि तीसरा सदस्य कक्षीय यान में ही रहेगा। इस तरह चीन दो रॉकेटों की मदद से इंसान को चंद्रमा तक पहुंचाने और सुरक्षित वापसी की योजना पर काम कर रहा है।
तीन दिन चंद्रमा पर रुकेंगे अंतरिक्ष यात्री
इस मिशन के तहत चंद्रमा की सतह पर उतरने वाले दोनों अंतरिक्ष यात्री करीब तीन दिन तक वहां रहेंगे। इस दौरान वे प्रतिदिन अंतरिक्ष में चहलकदमी यानी स्पेसवॉक करेंगे। इसके जरिए चंद्रमा की सतह से नमूने एकत्र करने, वैज्ञानिक प्रयोग करने और जरूरी उपकरण स्थापित करने जैसे कार्य किए जाएंगे।
तीसरा अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की कक्षा में मौजूद अंतरिक्ष यान में रहकर अभियान के दूसरे हिस्से को संभालेगा। मिशन की रूपरेखा इस तरह तैयार की गई है कि अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ अभियान से जुड़े जोखिमों को भी कम किया जा सके।
अभी बिना इंसान के हो रहे हैं परीक्षण
चीन इस महत्वाकांक्षी अभियान को सफल बनाने के लिए फिलहाल कई स्तरों पर तैयारियां कर रहा है। इसके तहत बिना चालक दल वाले परीक्षण किए जा रहे हैं। साथ ही पूरे अभियान की वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप अभ्यास भी किया जा रहा है, ताकि अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने से पहले रॉकेट, लैंडर और अंतरिक्ष यान की कार्यक्षमता परख ली जाए।
इन परीक्षणों के सफल रहने के बाद ही मानव मिशन को अंतिम मंजूरी दी जाएगी। चीन का लक्ष्य केवल चंद्रमा पर पहली बार इंसान उतारना नहीं है, बल्कि भविष्य में वहां स्थायी अनुसंधान केंद्र स्थापित करने की दिशा में भी आगे बढ़ना है।
अमेरिका के आर्टेमिस मिशन से भी जुड़ी है प्रतिस्पर्धा
चीन का यह अभियान अमेरिका के आर्टेमिस कार्यक्रम के समानांतर आगे बढ़ रहा है। अमेरिका भी चंद्रमा पर मानव वापसी की तैयारी में जुटा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है।
चीन की खास रणनीति अपने देश में विकसित तकनीक पर निर्भर रहने की है। लॉन्ग मार्च-10 रॉकेट, लान्यू लैंडर और मेंग्झोउ अंतरिक्ष यान इसी स्वदेशी तकनीकी क्षमता का हिस्सा हैं। चीन पहले ही अपने अंतरिक्ष स्टेशन और चंद्र रोवर अभियानों के जरिए अंतरिक्ष अनुसंधान में अनुभव हासिल कर चुका है।
चंद्रमा पर पहुंचने से आगे की अंतरिक्ष योजनाओं को मिलेगी रफ्तार
चंद्रमा पर मानव मिशन को केवल तकनीकी उपलब्धि या राष्ट्रीय गौरव के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इससे अंतरिक्ष विज्ञान, नई तकनीकों के विकास और भविष्य में चंद्रमा के संसाधनों के इस्तेमाल की संभावनाओं को भी बढ़ावा मिल सकता है।
इसके अलावा चंद्रमा पर लंबे समय तक रहने की तकनीक विकसित करना भविष्य में मंगल ग्रह पर मानव मिशन भेजने की तैयारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। चीन अब अपने पिछले अंतरिक्ष अभियानों से मिले अनुभव का इस्तेमाल करते हुए मानव को चंद्रमा की सतह तक पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यदि सभी परीक्षण सफल रहते हैं तो 2030 से पहले चीन अपने तीन अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के अभियान पर भेजने का लक्ष्य हासिल कर सकता है।





