हाईवे पर हादसा होते ही चालक को मिलेगा अलर्ट, जनवरी 2027 से शुरू होगा देश में ‘डिजिटल ग्रीन हाईवे’ का नया दौर
नई दिल्ली: देश के नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर सफर का तरीका जल्द बदलने वाला है। जनवरी 2027 से भारत में डिजिटल ग्रीन हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर के नए दौर की शुरुआत होने जा रही है। इसके तहत देश के सड़क नेटवर्क को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की तैयारी है। सफर के दौरान वाहन चालकों को उनकी कार की स्क्रीन या जीपीएस आधारित माध्यमों पर मौसम, गति सीमा, ट्रैफिक और सड़क हादसों से जुड़े रियल-टाइम अलर्ट मिल सकेंगे।
एआई निगरानी से लैस होंगे नए हाईवे
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इसके लिए नई नीति तैयार की है। इसके तहत एक जनवरी 2027 के बाद बनने वाले नए चार लेन वाले नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे को प्रोविजनल कम्प्लीशन सर्टिफिकेट और टोल वसूली की अनुमति तभी मिलेगी, जब उनमें एआई आधारित निगरानी व्यवस्था और ईवी चार्जिंग की सुविधा पूरी तरह उपलब्ध होगी।
एकीकृत डिजिटल नेटवर्क से जुड़ेगा रोड सिस्टम
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, वर्ष 2027 से बनने वाले हाईवे सिर्फ डामर और कंक्रीट की सड़कें नहीं होंगे, बल्कि देश के सड़क नेटवर्क को एक केंद्रीय एकीकृत क्लाउड डेटा बैंक से जोड़ा जाएगा। वाहन चालकों को यात्रा के दौरान डैशबोर्ड स्क्रीन या जीपीएस ऐप के जरिए मौसम की स्थिति, गति सीमा, उपलब्ध चार्जिंग स्लॉट और आगे मौजूद ट्रैफिक की जानकारी रियल-टाइम में मिलती रहेगी।
हादसा होते ही पीछे आ रहे वाहनों को मिलेगा अलर्ट
नई व्यवस्था में कोहरे, धुंध और रात के अंधेरे में भी काम करने वाले एआई सक्षम थर्मल एनपीआर कैमरे लगाए जाएंगे। हाईवे पर किसी दुर्घटना का पता चलते ही एआई सिस्टम उसके पीछे से आ रहे वाहनों तक इसकी जानकारी पहुंचाएगा। इससे चालकों को आगे हुए हादसे के बारे में समय रहते चेतावनी मिल सकेगी और दुर्घटना के बाद होने वाले दूसरे हादसों को रोकने में मदद मिलेगी।
पुराने हाईवे से अलग होगी नई तकनीक
मौजूदा और पुराने हाईवे पर निगरानी व्यवस्था काफी हद तक सामान्य सीसीटीवी कैमरों, असंगठित नेटवर्क और मैन्युअल निगरानी पर निर्भर रही है। इसके मुकाबले 2027 के बाद बनने वाले डिजिटल ग्रीन हाईवे एआई थर्मल एनपीआर कैमरों, सेंसर ग्रिड और एकीकृत क्लाउड डेटा बैंक से जुड़े होंगे। इससे हादसों और ट्रैफिक जाम जैसी घटनाओं की जानकारी तेजी से उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित होगी।
हर 40 से 50 किलोमीटर पर अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग
नई व्यवस्था के तहत वर्ष 2027 से बनने वाले एक्सप्रेसवे पर हर 40 से 50 किलोमीटर की दूरी पर 100 किलोवॉट क्षमता वाले अल्ट्रा-फास्ट ईवी चार्जिंग प्वाइंट उपलब्ध कराने की योजना है। इसके अलावा हाईवे डेवलपर्स को कुल निर्माण लागत का तीन से पांच फीसदी हिस्सा डिजिटल निगरानी, सेंसर ग्रिड और ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करना होगा।
चार एक्सप्रेसवे से पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत
डिजिटल ग्रीन हाईवे की योजना की शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, द्वारका एक्सप्रेसवे और चारधाम ऑल-वेदर रोड से की जाएगी। नए प्रोजेक्ट्स पर यह व्यवस्था पूरी तरह लागू होगी। वहीं पुराने टोल हाईवे को रेट्रोफिटिंग मॉडल के जरिए नई तकनीक से लैस करना जरूरी होगा।





