गठिया के दर्द से परेशान हैं? खानपान से लेकर व्यायाम तक, ये उपाय जोड़ों की तकलीफ कम करने में कर सकते हैं मदद

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नई दिल्ली: बढ़ती उम्र के साथ कई लोगों को जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। गठिया ऐसी ही एक बीमारी है, जो रोजमर्रा के कामकाज को भी मुश्किल बना सकती है। इसके प्रमुख प्रकारों में ऑस्टियोआर्थराइटिस और रूमेटाइड आर्थराइटिस शामिल हैं। ऑस्टियोआर्थराइटिस में जोड़ों के ऊतकों को नुकसान पहुंचता है, जबकि रूमेटाइड आर्थराइटिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से जोड़ों पर हमला करती है। खानपान में सुधार, नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रित रखने जैसे उपाय लक्षणों को संभालने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इनसे तुरंत राहत मिलने या गठिया ठीक होने की गारंटी नहीं है।

लहसुन और प्याज को खानपान में करें शामिल

लहसुन और प्याज का इस्तेमाल संतुलित आहार के हिस्से के रूप में किया जा सकता है। लहसुन में ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जिनमें सूजन कम करने वाले गुण हो सकते हैं। हालांकि, यह साबित नहीं है कि लहसुन या प्याज खाने से गठिया होने का खतरा निश्चित रूप से कम हो जाता है या इसका दर्द पूरी तरह ठीक हो जाता है। इन्हें पौष्टिक आहार के हिस्से के रूप में लें और इलाज का विकल्प न मानें।

गर्म और ठंडी सिकाई से मिल सकती है राहत

जोड़ों के दर्द में गर्म या ठंडी सिकाई से कुछ लोगों को आराम मिल सकता है। गर्म सिकाई अकड़न कम करने में मदद कर सकती है, जबकि ठंडी सिकाई सूजन और दर्द में राहत दे सकती है। इसके लिए गर्म पानी की थैली या कपड़े में लपेटकर बर्फ का इस्तेमाल किया जा सकता है। सिकाई करते समय तापमान का ध्यान रखें और बर्फ को सीधे त्वचा पर न लगाएं।

गर्म पानी में एप्सम सॉल्ट मिलाकर पैरों को भिगोने से कुछ लोगों को आराम महसूस हो सकता है, लेकिन इस बात के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं कि इससे शरीर से यूरिक एसिड बाहर निकलता है। पानी बहुत गर्म न रखें और यदि त्वचा में संवेदना कम होने या रक्त संचार की समस्या है, तो ऐसी प्रक्रिया अपनाने से पहले चिकित्सकीय सलाह लें।

ओमेगा-3 फैटी एसिड वाला भोजन हो सकता है फायदेमंद

संतुलित आहार में ओमेगा-3 फैटी एसिड शामिल करना स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है। मछली, अखरोट और कुछ बीज इसके स्रोत हैं। मछली के तेल में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड के सेवन से रूमेटाइड आर्थराइटिस के कुछ मरीजों में सूजन और जोड़ों की अकड़न में सीमित राहत मिल सकती है। हालांकि, इसका असर हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता। मछली के तेल के पूरक लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है, खासकर यदि आप नियमित दवाएं लेते हैं।

नियमित व्यायाम से जोड़ों की गतिशीलता बनाए रखें

गठिया के मरीजों के लिए नियमित और अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करना उपयोगी हो सकता है। हल्की सैर, तैराकी, पानी में किए जाने वाले व्यायाम और कम दबाव वाले एरोबिक अभ्यास जोड़ों की गतिशीलता बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। व्यायाम से मांसपेशियां मजबूत होती हैं और रोजमर्रा के काम करना आसान हो सकता है।

हालांकि, बहुत अधिक या अपनी क्षमता से ज्यादा व्यायाम करने से दर्द बढ़ सकता है। इसलिए शुरुआत हल्के अभ्यास से करें और जरूरत पड़ने पर फिजियोथेरेपिस्ट की मदद लें। यदि किसी गतिविधि के दौरान तेज दर्द या सूजन बढ़े, तो उसे रोककर चिकित्सकीय सलाह लें।

बढ़े हुए वजन को नियंत्रित रखना जरूरी

शरीर का अतिरिक्त वजन खासकर घुटनों और कूल्हों के जोड़ों पर दबाव बढ़ा सकता है। ऐसे में वजन को स्वस्थ सीमा में रखने से जोड़ों पर पड़ने वाला भार कम करने और दर्द नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय मार्गदर्शन अपनाना उपयोगी है।

तुलसी के तेल से मालिश करने से पहले रखें ध्यान

तुलसी का इस्तेमाल पारंपरिक घरेलू उपायों में किया जाता है। हालांकि, तुलसी के तेल से मालिश करने पर गठिया के दर्द में तुरंत राहत मिलने के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। यदि मालिश से आराम महसूस होता है, तो हल्के हाथों से करें और त्वचा पर जलन या एलर्जी होने पर इसका इस्तेमाल बंद कर दें। तेल या मालिश को डॉक्टर की ओर से दिए गए उपचार का विकल्प न बनाएं।

लगातार दर्द और सूजन को नजरअंदाज न करें

यदि जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन, अकड़न या चलने-फिरने में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। गठिया के अलग-अलग प्रकारों के उपचार भी अलग हो सकते हैं। समय पर सही निदान और उपचार से लक्षणों को नियंत्रित करने तथा जोड़ों को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है। यदि किसी जोड़ में अचानक तेज दर्द, अत्यधिक सूजन या लालिमा के साथ बुखार हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।

 

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