खाड़ी देशों को बड़ा झटका! केन्या में भारत ने बदला खेल, पेट्रोल-डीजल और जेट ईंधन सप्लाई में UAE-सऊदी को छोड़ा पीछे
नई दिल्ली: पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति के मामले में भारत ने पूर्वी अफ्रीकी देश केन्या में खाड़ी देशों को पीछे छोड़ दिया है। पश्चिम एशिया में ईंधन आपूर्ति मार्ग बाधित होने के बीच केन्या को पेट्रोल, डीजल और जेट ईंधन के लिए भारत का रुख करना पड़ा। इसके बाद भारत केन्या के लिए पेट्रोलियम उत्पादों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया है।
सरकारी समझौतों के तहत खाड़ी देशों से होती थी खरीद
केन्या लंबे समय से सरकारी समर्थन वाले समझौतों के जरिए पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद करता रहा है। इसमें पेट्रोल, डीजल और जेट ईंधन प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन उत्पादों की आपूर्ति मुख्य रूप से सऊदी अरामको, अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी और एमिरेट्स नेशनल ऑयल कंपनी जैसी कंपनियों से होती थी। हालांकि, पश्चिम एशिया में आपूर्ति संबंधी दिक्कतें बढ़ने के बाद केन्या को ईंधन की खरीद के स्रोत में बदलाव करना पड़ा।
बेल्जियम की वस्तु बाजार आंकड़ा कंपनी के आंकड़ों का हवाला देते हुए ऊर्जा विश्लेषक अनस अलहाजी ने बताया कि भारत ने केन्या को गैसोलीन, डीजल, जेट ईंधन और ईंधन तेल की आपूर्ति में संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने सामाजिक मंच एक्स पर यह भी कहा कि जुलाई में अफ्रीका को भारत का पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
अफ्रीकी बाजार में भारतीय ईंधन की मांग बढ़ी
अनस अलहाजी के अनुसार, जुलाई में अफ्रीका को भारत के पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात में सालाना आधार पर 66 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। उनके मुताबिक, यूरोपीय संघ की पाबंदियों के बाद भारतीय ईंधन खेपों का एक हिस्सा यूरोपीय बाजार से हटकर अफ्रीकी देशों की ओर चला गया। यूरोपीय संघ ने तीसरे देशों से ऐसे परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाया था, जिन्हें रूसी कच्चे तेल से तैयार किया गया था। इसके बाद भारतीय रिफाइनरियों के लिए अफ्रीकी बाजार में अवसर बढ़े।
भारत की रिफाइनिंग क्षमता बनी बड़ी ताकत
पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में भारत की बढ़ती भूमिका के पीछे उसकी मजबूत तेल शोधन क्षमता को अहम माना जा रहा है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल रिफाइनर और एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रिफाइनिंग देश है। देश में 22 चालू रिफाइनरियों की कुल वार्षिक क्षमता 258.1 मिलियन टन है।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 61.5 मिलियन टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया। खास बात यह है कि भारत अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल दूसरे देशों से आयात करता है। इसके बाद कच्चे तेल को देश की रिफाइनरियों में संसाधित कर पेट्रोलियम उत्पादों के रूप में अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजा जाता है।
जामनगर की रिफाइनरी ने भी दिखाई भारत की ताकत
भारत में दुनिया का सबसे बड़ा तेल शोधन परिसर भी मौजूद है। गुजरात के जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज का रिफाइनिंग परिसर देश की विशाल तेल शोधन क्षमता का प्रमुख उदाहरण है। इसी बीच रूस से जुड़ा एक और बदलाव सामने आया है। यूक्रेन के हमलों के कारण रूसी रिफाइनरियों पर दबाव बढ़ने के बाद रूस ने भी भारत से पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद शुरू की है।
केन्या पहुंची भारत से भेजी गई पेट्रोलियम खेप
केन्या के एक समाचार संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार, केन्या को संयुक्त अरब अमीरात से मिलने वाली पेट्रोलियम आपूर्ति जनवरी में करीब 90,000 बैरल प्रतिदिन थी, जो अगस्त में घटकर लगभग 15,000 बैरल प्रतिदिन रह गई। दूसरी ओर, भारत की आपूर्ति में तेजी आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 19 मार्च को गुजरात के सिक्का बंदरगाह से भेजा गया करीब 82.38 मिलियन लीटर मिट्टी का तेल केन्या के मोम्बासा बंदरगाह पहुंचा। इसी बंदरगाह के लिए अप्रैल में 156.75 मिलियन लीटर पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति निर्धारित थी। इसमें 81.15 मिलियन लीटर मिट्टी का तेल और 75.6 मिलियन लीटर डीजल शामिल था।
जुलाई में केन्या को भारत के निर्यात में 151.41 प्रतिशत उछाल
भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में केन्या को भारत का कुल निर्यात मूल्य के आधार पर 151.41 प्रतिशत बढ़ा। इस महीने केन्या भारत के पांच सबसे तेजी से बढ़ते निर्यात बाजारों में शामिल रहा। हालांकि, यह आंकड़ा सभी उत्पादों के निर्यात से जुड़ा है और केवल पेट्रोलियम उत्पादों को नहीं दर्शाता।
इसी अवधि में भारत का वैश्विक पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात भी तेजी से बढ़ा। जुलाई में इसका मूल्य 4.13 अरब डॉलर से बढ़कर 6.92 अरब डॉलर हो गया। इस तरह सालाना आधार पर इसमें करीब 67.64 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
भारत-केन्या कारोबार में पेट्रोलियम उत्पाद अहम
भारत और केन्या के बीच व्यापारिक रिश्तों में पेट्रोलियम उत्पादों की महत्वपूर्ण भूमिका है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत केन्या का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय कारोबार करीब 4.31 अरब डॉलर रहा। इसमें भारत का निर्यात लगभग 4.01 अरब डॉलर और केन्या से भारत का आयात करीब 290 मिलियन डॉलर रहा।
पेट्रोलियम उत्पाद भारत से केन्या को भेजे जाने वाले प्रमुख उत्पादों में शामिल रहे हैं। पश्चिम एशिया में आपूर्ति मार्गों में आई बाधाओं और अफ्रीकी बाजारों में बढ़ती मांग ने भारतीय रिफाइनरियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। केन्या में भारतीय ईंधन की बढ़ती हिस्सेदारी और जुलाई के निर्यात आंकड़े इस बदलाव को दर्शाते हैं।





