क्यूबा पर अमेरिकी प्रतिबंधों के खिलाफ भारत का बड़ा कदम, 130 देशों ने किया समर्थन; अमेरिका-इजरायल ने किया विरोध

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वाशिंगटन: संयुक्त राष्ट्र महासभा में क्यूबा पर लगाए गए अमेरिकी आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंधों को खत्म करने के प्रस्ताव पर भारत ने क्यूबा का समर्थन किया। बुधवार को हुए मतदान में भारत समेत 130 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया, जबकि अमेरिका और इजरायल सहित 17 देशों ने इसके विरोध में मतदान किया। वहीं, 25 देश मतदान से दूर रहे। हालांकि, पिछले साल के मुकाबले इस बार प्रस्ताव के समर्थन में कम वोट पड़े। अमेरिका ने नतीजों को अपनी कूटनीतिक सफलता बताया, जबकि क्यूबा ने आरोप लगाया कि अमेरिकी प्रतिबंधों से उसके नागरिकों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं।

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका और क्यूबा के प्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस

मतदान से एक दिन पहले संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका और क्यूबा के प्रतिनिधियों के बीच जोरदार बहस देखने को मिली। अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने क्यूबा की सरकार पर दमन और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। इस पर क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज पैरिला ने आपत्ति जताते हुए उनके भाषण को रोकने की मांग की।

वॉल्ट्ज ने जवाब देते हुए कहा, “यह संयुक्त राष्ट्र है, आपकी कम्युनिस्ट तानाशाही नहीं। आप मुझे चुप नहीं करा सकते।” इसके बाद क्यूबा के विदेश मंत्री ने अमेरिकी राजदूत को झूठा बताया। दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ने के कारण संयुक्त राष्ट्र की कार्यवाही कुछ समय के लिए रोकनी पड़ी।

क्यूबा ने अमेरिका पर सदस्य देशों को प्रस्ताव के खिलाफ मतदान करने के लिए दबाव डालने का आरोप भी लगाया। क्यूबा के अनुसार, कुछ देशों को वीजा प्रतिबंधों और आर्थिक पाबंदियों की धमकी दी गई थी।

पिछले साल की तुलना में घटा प्रस्ताव का समर्थन

संयुक्त राष्ट्र महासभा में क्यूबा पर अमेरिकी प्रतिबंध खत्म करने का प्रस्ताव हर साल पेश किया जाता है। इस बार 130 देशों ने इसके समर्थन में मतदान किया, जबकि पिछले वर्ष समर्थन करने वाले देशों की संख्या अधिक थी। प्रस्ताव के विरोध में अमेरिका और इजरायल सहित 17 देशों ने वोट दिया, जबकि 25 देश मतदान से दूर रहे।

जर्मनी और इटली जैसे देशों का मतदान से दूरी बनाए रखना भी चर्चा में रहा। अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने कहा कि दक्षिण कोरिया और जर्मनी जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं सहित कई देशों के रुख में बदलाव से अमेरिका संतुष्ट है।

अमेरिका वर्ष 1992 से लगभग हर साल इस प्रस्ताव का विरोध करता रहा है। हालांकि, 2016 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान अमेरिका ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया था। उस समय दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने की कोशिशें की जा रही थीं।

भारत ने किया क्यूबा का समर्थन, लेकिन प्रतिबंध हटाने का फैसला अमेरिका के हाथ में

भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करके क्यूबा पर अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र महासभा का यह प्रस्ताव बाध्यकारी नहीं है। इसलिए मतदान के आधार पर अमेरिका को प्रतिबंध हटाने के लिए कानूनी रूप से मजबूर नहीं किया जा सकता।

अमेरिकी प्रतिबंधों को समाप्त करने के लिए वहां की घरेलू कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। इनमें से कई प्रतिबंधों को हटाने में अमेरिकी कांग्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका है।

अमेरिकी प्रतिबंधों से क्यूबा में आर्थिक संकट बढ़ने का आरोप

क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज ने अमेरिका पर आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया। क्यूबा लंबे समय से दावा करता रहा है कि अमेरिकी पाबंदियों के कारण जरूरी वस्तुओं की कमी, महंगाई और ऊर्जा संकट गंभीर हुए हैं।

हाल के महीनों में ईंधन की कमी और लंबे समय तक बिजली कटौती ने भी क्यूबा के नागरिकों की परेशानियां बढ़ाई हैं। क्यूबा सरकार इन समस्याओं के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों को जिम्मेदार ठहराती है। दूसरी ओर, अमेरिका अपनी नीतियों का बचाव करते हुए क्यूबा की सरकार के शासन और मानवाधिकार रिकॉर्ड पर सवाल उठाता रहा है।

संयुक्त राष्ट्र में हुए मतदान से स्पष्ट है कि क्यूबा पर अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में मतभेद कायम हैं। भारत ने प्रतिबंधों को समाप्त करने के प्रस्ताव का समर्थन किया है, लेकिन इसके बाध्यकारी नहीं होने के कारण अमेरिकी नीति में तत्काल बदलाव की कोई गारंटी नहीं है।

 

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