इलाहाबाद विश्वविद्यालय को लगातार दूसरी बार बड़ी सौगात, पीएचडी शोधार्थियों को हर महीने मिलेंगे 60,900 रुपये तक
प्रयागराज: इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने शोध और नवाचार के क्षेत्र में एक और उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने विश्वेश्वरैया पीएचडी योजना-चरण दो के तहत विश्वविद्यालय को लगातार दूसरे वर्ष पीएचडी सीट प्रदान की है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े उच्चस्तरीय शोध को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय ने विश्वविद्यालय को 42.05 लाख रुपये का बजट भी स्वीकृत किया है।
इस योजना से सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्मार्ट ट्रांसपोर्टेशन और साइबर सिक्योरिटी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में शोध को गति मिलने की उम्मीद है। इविवि के जेके इंस्टीट्यूट के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नीलेश आनंद को योजना का नोडल अधिकारी बनाया गया था। कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने कहा कि विश्वविद्यालय अत्याधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में शोध के जरिए ‘विकसित भारत@2047’ के लक्ष्य में प्रभावी योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।
पिछले साल तीन शोधार्थियों ने लिया था प्रवेश
पिछले वर्ष इस योजना के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन विभाग में तीन शोधार्थियों ने प्रवेश लिया था। आदित्य रंजन प्रो. आशीष खरे के निर्देशन में एआई आधारित सड़क परिवहन सुरक्षा पर शोध कर रहे हैं। वीरेंद्र कुमार डॉ. नीलेश आनंद के निर्देशन में सेमीकंडक्टर डिजिटल ट्विन, अल्ट्रा-लो-पावर सेंसर और एआई आधारित सेंसर डिजाइन पर काम कर रहे हैं। वहीं सूबेदार सिंह डॉ. सुधाकर सिंह के निर्देशन में एआई और मशीन लर्निंग आधारित स्मार्ट हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम पर शोध कर रहे हैं।
पहले दो साल 53,650, फिर 60,900 रुपये मासिक फेलोशिप
विश्वेश्वरैया पीएचडी योजना के तहत चयनित शोधार्थियों को पहले दो वर्षों तक एचआरए सहित 53,650 रुपये प्रतिमाह फेलोशिप मिलेगी। इसके बाद अगले तीन वर्षों तक हर महीने 60,900 रुपये पीएचडी फेलोशिप दी जाएगी।
इसके अलावा संस्थान को 1.25 लाख रुपये संस्थागत ओवरहेड के लिए और शोध से जुड़े खर्चों के लिए हर साल 1.20 लाख रुपये की सहायता मिलेगी।
विदेश में छह महीने तक शोध का मौका
योजना के तहत शोधार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध का अवसर भी मिलेगा। चयनित शोधार्थी विदेश की प्रयोगशाला में अधिकतम छह महीने तक शोध कर सकेंगे। इस अवधि में 1.50 लाख रुपये प्रतिमाह फेलोशिप के साथ वीजा और यात्रा से जुड़ी सहायता का भी प्रावधान है।
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग लेने के लिए प्रत्येक शोधार्थी को 1.50 लाख रुपये तक की सहायता भी मिल सकती है।
पीएचडी की 959 सीटों पर दाखिला, 25 सितंबर तक आवेदन
इलाहाबाद विश्वविद्यालय शैक्षणिक सत्र 2026-27 में पीएचडी की 959 सीटों पर प्रवेश देगा। आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और आवेदन की अंतिम तिथि 25 सितंबर निर्धारित की गई है। इनमें 470 सीटें विश्वविद्यालय परिसर में और 489 सीटें संघटक महाविद्यालयों में हैं।
कुल 49 विषयों में से चार विषयों में कोई सीट नहीं है। इस तरह 45 विषयों में पीएचडी प्रवेश दिया जाएगा। रसायन विज्ञान में सबसे ज्यादा 84 सीटें हैं। इसके बाद कॉमर्स एंड बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में 75, भौतिकी में 74, विधि में 56, हिंदी में 50 तथा शिक्षा, अंग्रेजी और दर्शनशास्त्र में 45-45 सीटें हैं।
प्राचीन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व में 43, गणित में 34, कंप्यूटर साइंस में 28, अर्थशास्त्र में 27, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में 23 और जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में चार सीटें हैं।
संघटक महाविद्यालयों में 203 सीटें इलाहाबाद डिग्री कॉलेज में
संघटक महाविद्यालयों की कुल 489 पीएचडी सीटों में सबसे ज्यादा 203 सीटें इलाहाबाद डिग्री कॉलेज में हैं। इनमें भी विधि विषय में सबसे ज्यादा 38 सीटें हैं। सीएमपी में 89, एसएस खन्ना में 46 और जगत तारन में 36 सीटें निर्धारित हैं।





