नकली सिक्कों के गैंग का तिहाड़ कनेक्शन, जेल में युवाओं का ‘ब्रेनवॉश’ कर बनाते थे सदस्य; बाहर आते ही नेटवर्क में एंट्री

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सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के तीतरों में पकड़ी गई नकली सिक्कों की फैक्ट्री और कथित 70 करोड़ रुपये के नकली सिक्कों को बाजार में खपाने के मामले में नया खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि गैंग से जुड़े लोग तिहाड़ जेल में बंद युवाओं से संपर्क कर उनका ब्रेनवॉश करते थे और जेल से बाहर आने के बाद उन्हें गिरोह में शामिल कर लेते थे। इस नेटवर्क के कई सदस्य खुद भी जेल में रह चुके हैं।

जांच के मुताबिक उपकार लूथरा तिहाड़ जेल में तीन बार और रोहिणी जेल में एक बार बंद रह चुका है। पारस जैन, संतोष और सहारनपुर निवासी हिमांशु के भी तिहाड़ जेल में रहने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि जेल से बाहर आने वाले कितने युवा इस नेटवर्क के संपर्क में आए।

जेल में ही तैयार करते थे नए सदस्यों का नेटवर्क

पुलिस जांच में पता चला है कि जेल में रहने के दौरान गैंग से जुड़े आरोपी दूसरे बंदियों के संपर्क में आते थे। आरोप है कि उन्हें गिरोह की गतिविधियों और कमाई के तरीकों के बारे में बताया जाता था और धीरे-धीरे अपने नेटवर्क से जोड़ने के लिए तैयार किया जाता था।

जेल से बाहर आने के बाद गैंग के सदस्य इन युवाओं से दोबारा संपर्क करते और उन्हें गिरोह में शामिल कर लेते थे। जांच एजेंसियां अब तिहाड़ समेत अन्य जेलों से बाहर आए युवाओं के बारे में जानकारी जुटा रही हैं, ताकि पता लगाया जा सके कि इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है।

सात रजिस्टर और आठ मोबाइल खोलेंगे नेटवर्क के राज

नकली सिक्कों की फैक्ट्री से बरामद सात रजिस्टर और आठ मोबाइल फोन जांच में अहम कड़ी बन गए हैं। पुलिस रजिस्टरों में दर्ज हिसाब-किताब और मोबाइल फोन में मौजूद संपर्कों के जरिए नकली सिक्कों के उत्पादन से लेकर उनकी सप्लाई तक के नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

रजिस्टरों में उत्पादन, बिक्री, रकम के लेनदेन और एजेंटों से जुड़ी जानकारी मिलने की संभावना है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि कितनी मात्रा में नकली सिक्के बनाए गए और उन्हें किन-किन इलाकों में भेजा गया। मोबाइल फोन की कॉल डिटेल और संपर्क सूची खंगालकर एजेंटों तथा गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।

पंजाब, बिहार और पश्चिमी यूपी तक नेटवर्क

प्रारंभिक जांच में गैंग के संपर्क पंजाब, बिहार और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सामने आए हैं। पुलिस इन राज्यों से जुड़े लोगों और संदिग्ध लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। फैक्ट्री में नकली सिक्के तैयार करने वालों के साथ-साथ उनकी सप्लाई और बाजार में खपाने वाले लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

20 रुपये के नकली सिक्के बनाकर बाजार में खपाए

पुलिस के अनुसार गिरोह ने बाजार में चलाने के लिए 8 ग्राम वजन के 20 रुपये के नकली सिक्के तैयार किए थे। वहीं, असली सिक्के का वजन करीब 10 से 12 ग्राम के बीच बताया गया है। फैक्ट्री से नकली सिक्के बनाने की सामग्री के अलावा बरामद रजिस्टर और दस्तावेज अब जांच का प्रमुख आधार हैं।

वहीं, मामले में वांछित आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस बिहार तक दबिश दे रही है। जांच एजेंसियां फैक्ट्री से जुड़े लोगों, एजेंटों और बाजार में नकली सिक्के खपाने वाले नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।

 

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