दिल्ली में PG चलाने के लिए अब लाइसेंस जरूरी, सरकार ला रही नई नीति; 15 छात्रों पर गार्ड और वार्डन अनिवार्य
नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 5 मंजिला इमारत गिरने की घटना के बाद दिल्ली सरकार ने पीजी संचालन के नियम सख्त करने की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सरकार पीजी के नियमन के लिए नई नीति लाने जा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत दिल्ली में पीजी चलाने के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने प्रस्तावित नियमों की जानकारी साझा की है।
6 सितंबर को सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई थी। हादसे के बाद दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में पीजी में रहने वाले छात्रों ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। इसके बाद सरकार ने पीजी संचालन से जुड़े नियमों को व्यवस्थित और सख्त करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
पीजी संचालकों को लेना होगा लाइसेंस, सीसीटीवी भी जरूरी
प्रस्तावित नीति के मुताबिक दिल्ली में पीजी चलाने वाले सभी संचालकों को लाइसेंस लेना होगा। इसके साथ ही पुलिस और एमसीडी से सत्यापन भी कराना पड़ेगा। पीजी के अंदर और बाहर सीसीटीवी कैमरे लगाना भी अनिवार्य किया जाएगा।
सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग कम से कम 30 दिनों तक सुरक्षित रखना जरूरी होगा, ताकि किसी घटना की स्थिति में रिकॉर्डिंग के आधार पर जांच की जा सके।
15 या उससे ज्यादा छात्रों पर सुरक्षा गार्ड अनिवार्य
नई नीति के तहत जिस पीजी में 15 या उससे अधिक छात्र रहेंगे, वहां सुरक्षा गार्ड रखना अनिवार्य होगा। गार्ड की तैनाती रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक करनी होगी।
पीजी में आने वाले बाहरी लोगों की जानकारी भी रजिस्टर में दर्ज करनी होगी। प्रस्तावित नियमों के अनुसार बाहरी लोगों को सुबह 8 बजे से रात 9 बजे तक ही पीजी में प्रवेश दिया जाएगा।
वार्डन की तैनाती होगी अनिवार्य
नई व्यवस्था में प्रत्येक पीजी के साथ वार्डन रखना भी जरूरी किया जाएगा। वार्डन के रहने की व्यवस्था पीजी परिसर के अंदर करनी होगी या फिर पीजी से अधिकतम 500 मीटर की दूरी के भीतर उसकी व्यवस्था करनी होगी।
नीति तैयार करने वालों के अनुसार, वार्डन के 500 मीटर के दायरे में रहने से किसी आपात स्थिति में वह करीब 15 मिनट के भीतर पीजी पहुंच सकेगा और मामले को संभालने में मदद कर सकेगा।
मनमाना किराया वसूलने पर भी लगेगी रोक
प्रस्तावित पीजी नीति में कमरों के किराये को लेकर भी नियम बनाए जाएंगे। सरकार अलग-अलग इलाकों के लिए किराये की सीमा यानी रेंट बैंड तय करने की तैयारी कर रही है। इसका उद्देश्य छात्रों से मनमाना किराया वसूलने पर रोक लगाना है।
किराये की सीमा तय करते समय पीजी की लोकेशन के साथ वहां उपलब्ध सुविधाओं, बाजार में चल रहे किराये और आसपास के कॉलेजों की दूरी को ध्यान में रखा जाएगा। इसके अलावा पीजी के नजदीक सार्वजनिक परिवहन की सुविधा और उसकी दूरी को भी किराया तय करने के आधार में शामिल किया जाएगा।





