हर खुजली को दाद समझना पड़ सकता है भारी, मानसून में ऐसे रखें त्वचा का ख्याल; जानें फंगल संक्रमण और खुजली में फर्क

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नई दिल्ली: बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन इस दौरान त्वचा से जुड़ी कई परेशानियां बढ़ सकती हैं। वातावरण में नमी और उमस ज्यादा होने के कारण पसीना जल्दी नहीं सूखता और त्वचा लंबे समय तक गीली बनी रहती है। यही वजह है कि मानसून में दाद, फंगल संक्रमण और खुजली जैसी समस्याएं अधिक परेशान कर सकती हैं। खास बात यह है कि आम बोलचाल में दाद, खाज और खुजली को अक्सर एक ही समस्या मान लिया जाता है, जबकि इनके कारण और लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं।

दाद को आमतौर पर फंगल संक्रमण या रिंगवर्म के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसमें त्वचा पर गोल या चकत्ते जैसे निशान दिखाई दे सकते हैं। इन चकत्तों के किनारे लाल या थोड़े उभरे हुए हो सकते हैं और वहां तेज खुजली भी हो सकती है। दाद शरीर के अलग-अलग हिस्सों में हो सकता है और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क या उसके निजी सामान के इस्तेमाल से फैलने का खतरा रहता है। इसलिए ऐसे लक्षणों को सामान्य खुजली समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

खाज और खुजली में क्या अंतर है?

खाज शब्द का इस्तेमाल अलग-अलग जगहों पर अलग अर्थ में किया जाता है। आम बोलचाल में इसका इस्तेमाल खुजली या खुजली वाली त्वचा की समस्या के लिए किया जाता है। केवल खाज होने से यह तय नहीं किया जा सकता कि समस्या फंगल संक्रमण की ही है। इसके पीछे एलर्जी, त्वचा में जलन, फंगल संक्रमण या दूसरी वजहें भी हो सकती हैं। इसलिए सही कारण जानने के लिए लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है।

खुजली खुद कोई बीमारी नहीं बल्कि एक लक्षण है। त्वचा में खुजली कई कारणों से हो सकती है। एलर्जी, त्वचा का रूखापन, पसीना, फंगल संक्रमण, कीड़े के काटने या त्वचा से जुड़ी दूसरी समस्याएं इसकी वजह हो सकती हैं। इसलिए हर तरह की खुजली को दाद मान लेना सही नहीं है। अगर खुजली के साथ गोल चकत्ते बन रहे हैं या निशान धीरे-धीरे फैल रहे हैं तो फंगल संक्रमण की संभावना हो सकती है और ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर रहता है।

मानसून में क्यों बढ़ जाता है फंगल संक्रमण का खतरा?

मानसून के दौरान गर्म और नम वातावरण फंगस के लिए अनुकूल माना जाता है। शरीर के उन हिस्सों में संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है जहां त्वचा आपस में रगड़ खाती है या नमी लंबे समय तक बनी रहती है। बगल, कमर, जांघों के बीच और पैरों की उंगलियों के बीच का हिस्सा इसका उदाहरण है।

गीले कपड़े, मोजे और जूते लंबे समय तक पहने रहने से भी त्वचा पर नमी बनी रहती है, जिससे फंगल संक्रमण की समस्या बढ़ सकती है।

बारिश में भीगने के बाद इन बातों का रखें ध्यान

बारिश में भीगने के बाद सबसे जरूरी है कि गीले कपड़े जल्द से जल्द बदलें। शरीर को अच्छी तरह सुखाएं और उन हिस्सों पर विशेष ध्यान दें जहां नमी आसानी से जमा होती है। रोज साफ और सूखे मोजे पहनें तथा गीले जूतों को लंबे समय तक पहनने से बचें।

बहुत ज्यादा तंग कपड़े पहनने से भी बचना चाहिए। ऐसे कपड़ों में पसीना और नमी त्वचा के संपर्क में लंबे समय तक रह सकती है, जिससे त्वचा संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

दूसरों की निजी चीजें इस्तेमाल करने से बचें

व्यक्तिगत साफ-सफाई के साथ संक्रमण को फैलने से रोकना भी जरूरी है। किसी दूसरे व्यक्ति का तौलिया, कपड़े, मोजे या निजी सामान इस्तेमाल करने से बचें।

अगर त्वचा पर बने गोल चकत्ते लगातार बढ़ रहे हैं, खुजली बहुत ज्यादा है या समस्या बार-बार लौट रही है तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

स्टेरॉयड वाली क्रीम बिना सलाह के न लगाएं

खास तौर पर बिना डॉक्टर की सलाह के ऐसी क्रीम लगाने से बचना चाहिए, जिसमें स्टेरॉयड शामिल हो। गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर ऐसी क्रीम फंगल संक्रमण के लक्षणों को बदल सकती है और समस्या को अधिक जटिल बना सकती है।

सही समय पर समस्या के कारण की पहचान और उचित उपचार ही त्वचा की परेशानी को बढ़ने से रोकने का बेहतर तरीका है। मानसून के दौरान त्वचा को साफ, सूखा और सुरक्षित रखना दाद, फंगल संक्रमण और कई तरह की खुजली से बचाव में मदद कर सकता है।

 

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