बैंकों के पास बंपर अतिरिक्त नकदी, RBI ने एक दिन में खींचे ₹71,971 करोड़; जानें आम आदमी पर क्या होगा असर
नई दिल्ली: देश के बैंकिंग तंत्र में इस समय बड़ी मात्रा में अतिरिक्त नकदी मौजूद है। इसी अतिरिक्त पैसे को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों से एक दिन के लिए 71,971 करोड़ रुपये अपने पास ले लिए। इसके लिए आरबीआई ने 75,000 करोड़ रुपये की नीलामी रखी थी, लेकिन बैंकों ने 71,971 करोड़ रुपये की राशि ही उपलब्ध कराई।
आपके बैंक खाते पर क्या पड़ेगा असर
आरबीआई के इस कदम का मतलब यह नहीं है कि आम ग्राहकों के बैंक खाते से पैसा निकाल लिया जाएगा। खाते में जमा रकम पर इसका कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ता। यह कार्रवाई मुख्य रूप से बैंकों के बीच मौजूद अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने के लिए की गई है।
हालांकि, बाजार में पैसे की उपलब्धता और ब्याज दरों पर इसका असर पड़ सकता है। आगे चलकर इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव होम लोन, कार लोन और दूसरे कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ सकता है। लेकिन केवल इस एक कार्रवाई के आधार पर ब्याज दरों में तत्काल बदलाव होना जरूरी नहीं है।
RBI ने क्यों खींची इतनी बड़ी रकम
जब बैंकों के पास जरूरत से ज्यादा नकदी होती है तो वे अतिरिक्त पैसा दूसरे बैंकों को उधार दे सकते हैं। इससे बाजार में पैसों की उपलब्धता बढ़ती है और कम ब्याज दर पर धन उपलब्ध होने की स्थिति बन सकती है।
आरबीआई अतिरिक्त नकदी को कुछ समय के लिए अपने पास रखकर बैंकिंग व्यवस्था में पैसों की उपलब्धता को संतुलित करता है। इसके लिए वैरिएबल रेट रिवर्स रेपो यानी VRRR जैसी मौद्रिक व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता है।
बैंकिंग सिस्टम में करीब 4.92 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त कैश
रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, 21 सितंबर तक बैंकिंग सिस्टम में करीब 4.92 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त कैश मौजूद था। यानी बैंकों के पास उनकी तत्काल जरूरत के मुकाबले काफी अधिक धन उपलब्ध था।
आरबीआई पिछले कुछ समय से इस अतिरिक्त नकदी को धीरे-धीरे कम करने की प्रक्रिया में है। इसके लिए केंद्रीय बैंक ने सरकारी बॉन्ड बेचकर भी बाजार से पैसा वापस खींचा है।
बैंकों के पास इतना अतिरिक्त पैसा क्यों आया
बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी आने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें विदेशी मुद्रा से जुड़े लेनदेन, बैंकों में विदेशी मुद्रा जमा में बढ़ोतरी और केंद्रीय बैंक की कुछ वित्तीय गतिविधियां शामिल हैं।
आरबीआई का उद्देश्य बाजार में नकदी का संतुलन बनाए रखना है। केंद्रीय बैंक यह सुनिश्चित करने की कोशिश करता है कि बाजार में पैसे की न तो अत्यधिक कमी हो और न ही जरूरत से ज्यादा नकदी उपलब्ध रहे। इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए आरबीआई परिस्थितियों के अनुसार कभी बाजार में पैसा डालता है और कभी अतिरिक्त नकदी वापस खींचता है।





