फ्रांस से 10 मिराज भारत लाने वाले आशुतोष दीक्षित बने नए IAF चीफ, 3300 घंटे की उड़ान और 3 राष्ट्रपति पदकों का शानदार रिकॉर्ड

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नई दिल्ली: भारतीय वायु सेना को नया प्रमुख मिल गया है। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने चीफ ऑफ एयर स्टाफ के रूप में भारतीय वायु सेना की कमान संभाल ली है। करीब चार दशक लंबे सैन्य करियर में उन्होंने फाइटर पायलट से लेकर वायु सेना के शीर्ष पद तक का सफर तय किया है। उनके करियर में युद्ध अभियानों से लेकर फाइटर विमानों के परीक्षण और रणनीतिक योजना तक कई अहम जिम्मेदारियां शामिल रही हैं। फ्रांस से मिराज 2000 विमानों को भारत लाने के मिशन से लेकर कारगिल युद्ध के दौरान निभाई गई जिम्मेदारियों तक उनका सैन्य सफर कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों से भरा रहा है।

आशुतोष दीक्षित को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। वह नेशनल डिफेंस एकेडमी के 69वें कोर्स के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने बांग्लादेश से स्टाफ कोर्स किया और नई दिल्ली स्थित नेशनल डिफेंस कॉलेज में 57वें एनडीसी कोर्स के तहत प्रशिक्षण लिया। सैन्य शिक्षा के साथ उन्हें विमानों की उड़ान का भी लंबा अनुभव हासिल है।

3300 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव

आशुतोष दीक्षित क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट रहे हैं। उन्होंने मिराज 2000 समेत कई फाइटर विमान, ट्रेनर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट उड़ाए हैं। उनके नाम 3300 घंटे से ज्यादा की उड़ान का अनुभव दर्ज है। लंबे फ्लाइंग करियर की वजह से उन्हें भारतीय वायु सेना के संचालन और तकनीकी दोनों पहलुओं की गहरी समझ हासिल हुई।

फ्रांस से 10 मिराज विमान भारत लाने की मिली थी जिम्मेदारी

उनके सैन्य करियर की सबसे उल्लेखनीय जिम्मेदारियों में फ्रांस से मिराज 2000 विमानों को भारत लाने का मिशन शामिल रहा। विंग कमांडर के तौर पर उन्हें फ्रांस से 10 मिराज विमानों को सुरक्षित भारत लाने की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने इस मिशन को दो बैच में पूरा किया।

इसके अलावा उन्होंने पश्चिमी सीमा पर मिराज 2000 की 9वीं स्क्वाड्रन की कमान संभाली और उसे कम समय में युद्ध के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।

कारगिल युद्ध में भी निभाई अहम भूमिका

कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन सफेद सागर और सीमा पर चले ऑपरेशन रक्षक में भी आशुतोष दीक्षित ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में ग्रुप कैप्टन के रूप में उन्होंने छह बड़ी विदेशी कंपनियों के फाइटर जेट्स के फील्ड ट्रायल और तकनीकी मूल्यांकन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों का नेतृत्व किया। इन जिम्मेदारियों के दौरान उनकी तकनीकी समझ और रणनीतिक क्षमता का इस्तेमाल हुआ।

तीन राष्ट्रपति पदकों से सम्मानित

आशुतोष दीक्षित को उनकी सेवाओं के लिए कई महत्वपूर्ण सैन्य सम्मान मिल चुके हैं। उन्हें 26 जनवरी 2006 को वायु सेना मेडल से सम्मानित किया गया। इसके बाद 26 जनवरी 2011 को विशिष्ट सेवा मेडल और 26 जनवरी 2023 को अति विशिष्ट सेवा मेडल दिया गया।

ये सम्मान उनके लंबे सैन्य करियर के दौरान निभाई गई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों और सेवाओं को दर्शाते हैं।

वायु सेना के कई अहम पदों पर संभाली जिम्मेदारी

38 साल से अधिक लंबे करियर में आशुतोष दीक्षित ने एयर हेडक्वार्टर और कमान स्तर पर कई महत्वपूर्ण पद संभाले हैं। वह एएसटीई बेंगलुरु की फाइटर टेस्ट स्क्वाड्रन और ग्वालियर की 9वीं स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर रहे हैं। उन्होंने डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ के तौर पर प्रोजेक्ट्स और प्लानिंग से जुड़ी जिम्मेदारियां भी संभालीं।

इसके बाद उन्होंने प्रयागराज स्थित सेंट्रल एयर कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ और चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ जैसी अहम जिम्मेदारियां निभाईं। वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ के पद पर रहने के बाद अब उन्होंने भारतीय वायु सेना के सर्वोच्च पद की जिम्मेदारी संभाल ली है।

 

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