राम मंदिर दान विवाद में जांच की राह कठिन! 45 दिन के CCTV बैकअप ने बढ़ाई SIT की चुनौती, फोरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी नजर
नई दिल्ली: अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान संग्रह से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच अब एक जटिल मोड़ पर पहुंच गई है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) के सामने सबसे बड़ी चुनौती ठोस डिजिटल साक्ष्य जुटाने की है, क्योंकि मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों का बैकअप केवल सीमित अवधि तक ही सुरक्षित रहता है। जानकारी के मुताबिक, सिस्टम में करीब 45 दिनों का रिकॉर्ड ही उपलब्ध रहता है, जिससे पुराने घटनाक्रमों की पुष्टि करना मुश्किल हो गया है।
सीसीटीवी फुटेज में छेड़छाड़ के संकेतों ने बढ़ाई चिंता
जांच के दौरान उपलब्ध फुटेज में कुछ स्थानों पर कथित छेड़छाड़ के संकेत मिलने की बात सामने आई है। इसके बाद जांच एजेंसियों ने तकनीकी विश्लेषण को और अधिक प्राथमिकता दे दी है। अब जांच का दायरा फोरेंसिक जांच, कर्मचारियों के बयानों और पूछताछ में सामने आ रहे तथ्यों पर केंद्रित हो गया है। एसआईटी लगातार संबंधित कर्मचारियों और जिम्मेदार पदाधिकारियों से अलग-अलग स्तर पर पूछताछ कर रही है।
पुरानी रिकॉर्डिंग को लेकर उठे सवाल
मामले में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े एक पूर्व पदाधिकारी ने आरोप लगाया था कि कई महीनों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग हटाई गई थी। हालांकि सीमित बैकअप और तकनीकी बाधाओं के चलते इन आरोपों की पुष्टि फिलहाल आसान नहीं है। जांच अधिकारियों का मानना है कि हाल के 45 दिनों के भीतर हुई किसी भी गतिविधि से जुड़े साक्ष्य मिलने की संभावना अधिक है, लेकिन उससे पहले की घटनाओं को प्रमाणित करना चुनौती बना हुआ है।
पूछताछ में सामने आए विरोधाभासी बयान
सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान कई व्यक्तियों के बयानों में विरोधाभास देखने को मिला है। कुछ संदिग्धों ने कथित तौर पर लंबे समय से वित्तीय अनियमितताओं के संकेत दिए हैं, जिससे जांच को नई दिशा मिली है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कथित गड़बड़ियां कब शुरू हुईं और उनका दायरा कितना व्यापक था।
नकदी और चढ़ावे के प्रबंधन पर भी सवाल
जांच एजेंसियां मंदिर में प्राप्त नकदी और अन्य चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल कर रही हैं। लेकिन डिजिटल साक्ष्यों की सीमित उपलब्धता के कारण केवल बयानों के आधार पर अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचना आसान नहीं माना जा रहा। इसी वजह से एसआईटी अब फोरेंसिक रिपोर्ट, तकनीकी परीक्षण और तथ्यों के मिलान पर विशेष जोर दे रही है।
सच्चाई तक पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती
पूरे प्रकरण में जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सीमित सीसीटीवी रिकॉर्ड, कथित छेड़छाड़ के आरोपों और विरोधाभासी बयानों के बीच वास्तविक तथ्यों को निष्पक्ष रूप से सामने लाना है। जांच आगे बढ़ने के साथ नए खुलासों की संभावना जताई जा रही है, जिनसे मामले की कई अहम परतें खुल सकती हैं।





