नववर्ष पर अयोध्या में भक्ति का विशेष उल्लास, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर नया ध्वज फहराया गया

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अयोध्या। नववर्ष के पावन अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में धार्मिक आस्था का भव्य दृश्य देखने को मिला, जब मंदिर के शिखर पर स्थापित ध्वज को बदलकर नया ध्वज आरोहित किया गया। मंदिर से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार, यह ध्वज 25 नवंबर को हुए पूर्व ध्वजारोहण के बाद अब परंपरा के तहत परिवर्तित किया गया है। नए ध्वज पर तेजस्वी सूर्य, पवित्र ‘ओम’ और कोविदरा वृक्ष के प्रतीक अंकित हैं, जो आध्यात्मिक विरासत और भगवान राम के वंश का प्रतिनिधित्व करते हैं।

रामलला की आरती के समय में किया गया बदलाव
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा दर्शन अवधि बढ़ाए जाने के चलते रामलला की आरतियों के समय में बदलाव किया गया है। नई समय सारिणी के अनुसार मंगला आरती सुबह 4 बजे होगी, जिसके बाद पट बंद कर श्रृंगार की तैयारी की जाएगी।
श्रृंगार आरती अब सुबह 6:30 बजे के बजाय 6 बजे होगी, जबकि शयन आरती का समय रात 9:30 बजे से बढ़ाकर 10 बजे कर दिया गया है।

रामनवमी के मद्देनजर मंदिरों में शुरू हुए अनुष्ठान
वर्ष प्रतिपदा के साथ ही अयोध्या के सभी वैष्णव मंदिरों में कलश स्थापना कर नौ दिवसीय अनुष्ठान की शुरुआत हो गई है। इस दौरान श्रीरामचरितमानस का सामूहिक नवाह्न पारायण आरंभ किया गया है, जिसकी पूर्णाहुति रामनवमी पर होगी।
साथ ही विभिन्न मंदिरों में कथावाचकों द्वारा श्रीमद वाल्मीकि रामायण और श्रीरामचरितमानस पर आधारित प्रवचन भी शुरू हो गए हैं।

नवरात्र और नववर्ष का उत्सव एक साथ
संवत् 2083 के आगमन के साथ वासंतिक नवरात्र का भी शुभारंभ हो गया है। नवरात्र के पहले दिन से ही राम मंदिर में विशेष नौ दिवसीय अनुष्ठान शुरू किया गया है।
वैदिक आचार्यों ने शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना कर रामायण, रामचरितमानस और दुर्गा सप्तशती का पाठ आरंभ किया है। 27 मार्च को रामनवमी के दिन रामलला के प्राकट्य का भव्य उत्सव देशभर में मनाया जाएगा।

श्रद्धालुओं की बढ़ी आवाजाही, मेले की भी शुरुआत
नववर्ष के साथ ही रामनवमी मेले की भी शुरुआत हो गई है, जिसके चलते अयोध्या में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। मंदिरों में भक्ति, अनुष्ठान और उत्सव का माहौल बना हुआ है, जिससे पूरी नगरी धार्मिक रंग में रंगी नजर आ रही है।

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