आतंकवाद पर दोहरा रवैया नहीं चलेगा, SCO की बैठक में चीन के सामने ही पाक को झाड़ने लगे राजनाथ सिंह
किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को बेहद कड़ा संदेश दिया है। राजनाथ सिंह ने चीन और पाकिस्तान को सुनाते हुए कहा कि किसी भी कीमत पर सरकार प्रायोजित ‘सीमापार आतंकवाद’ की अनदेखी नहीं की जा सकती है और इस मामले को लेकर दोहरा मापदंड अपनाने की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने पाकिस्तान को टारगेट करते हुए साफ कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने अपना दृढ़ संकल्प दिखा दिया था और बता दिया है कि आतंकवाद के पनाहगाहों को अब किसी तरह की छूट नहीं मिलने वाली है।
बता दें कि एससीओ में चीन रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस भी शामिल हैं। राजनाथ सिंह ने चीन के प्रतिनिधि के सामने भी पाकिस्तान को सुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा, ‘हमें सरकार द्वारा प्रायोजित उस सीमा पार आतंकवाद को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए जो किसी राष्ट्र की संप्रभुता पर हमला करता है।’ सिंह ने कहा, ‘दोहरे मापदंड की कोई गुंजाइश नहीं है और एससीओ को आतंकवादियों को उकसाने, उन्हें पनाह देने और सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग करने में हिचकिचाना नहीं चाहिए।’
रक्षा मंत्री ने आतंकवाद से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर समन्वित प्रयासों की वकालत की। उन्होंने कहा, ”हम कट्टरपंथ, चरमपंथ और आतंकवाद के रूप में बढ़ती चुनौती का भी सामना कर रहे हैं। आतंकवाद उभरती विश्व व्यवस्था के लिए सबसे गंभीर खतरा बन गया है।” सिंह ने कहा, ”इस परिदृश्य में एससीओ हमारे साझा मूल्यों पर आधारित एक संगठन के रूप में उभरा। एससीओ ने आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई में ऐसे कृत्यों और विचारधाराओं की निंदा की है।’
रक्षा मंत्री ने मौजूदा भू-राजनीतिक उथल-पुथल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दुनिया आज बढ़ती एकतरफा नीतियों और संघर्षों के रूप में वास्तविकता का सामना कर रही है। सिंह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में लगातार हुए संघर्षों में जान-माल का चिंताजनक दर पर नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा, ”रक्षा के लिए जिम्मेदार लोग होने के नाते, यह हमारे लिए आत्ममंथन करने और इस स्थिति से निपटने के लिए प्रभावी कदम उठाने का समय है।’
आतंकवाद पर भारत की जीरो टॉलरेंस की नीति
उन्होंने पिछले वर्ष की तियानजिन घोषणा का उल्लेख किया, जिसने आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृढ़ और सामूहिक रुख को दर्शाया, और इसे आतंकवाद तथा उसके समर्थकों के प्रति उसकी जीरो टॉलरेंस नीति का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा, “सामूहिक विश्वसनीयता की वास्तविक परीक्षा निरंतरता में निहित है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आतंकवाद की कोई राष्ट्रीयता और कोई धर्म नहीं होता। देशों को आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ और सामूहिक रुख अपनाना चाहिए।”



