तोतों ने खाया फल, सरकार भरेगी हर्जाना: बॉम्बे हाईकोर्ट का अनोखा फैसला
मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ (Nagpur Peeth) ने एक दिलचस्प और अहम फैसले में कहा है कि तोते भी वन्यजीव की श्रेणी में आते हैं और अगर इनके कारण किसानों की फसल को नुकसान होता है, तो उसकी भरपाई सरकार को करनी होगी।
यह मामला महाराष्ट्र के वर्धा जिले के किसान महादेव डेकाटे से जुड़ा है। वर्ष 2016 में उनके अनार के बगीचे पर जंगली तोतों के झुंड ने हमला कर दिया था, जिससे करीब 200 पेड़ों के लगभग 50% फल नष्ट हो गए थे। नुकसान के बाद डेकाटे ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की, लेकिन यह कहते हुए इंकार कर दिया गया कि नियमों में सिर्फ हाथी या जंगली भैंसे से हुए नुकसान पर ही मुआवजा मिलता है।
मामला अदालत पहुंचने पर जस्टिस उर्मिला जोशी-फालके और जस्टिस निवेदिता मेहता की पीठ ने सरकार की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा सिर्फ नागरिकों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि उनके कारण हुए नुकसान की भरपाई करना भी राज्य का कर्तव्य है। अदालत ने किसान को 40,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
अदालत ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 का हवाला देते हुए कहा कि जंगली जानवर और पक्षी राज्य की संपत्ति माने जाते हैं। चूंकि तोते (विशेषकर अलेक्जेंड्रिन पैराकीट) इस कानून के तहत संरक्षित हैं, इसलिए उनके द्वारा किए गए नुकसान की जिम्मेदारी से सरकार बच नहीं सकती।
कोर्ट ने यह भी कहा कि मुआवजे के मामलों में भेदभाव संविधान के सिद्धांतों के खिलाफ है। यदि कुछ जानवरों से हुए नुकसान पर मुआवजा दिया जाता है, तो अन्य वन्यजीवों के मामलों में भी समान नियम लागू होना चाहिए।



