तेल संकट गहराया: 22 दिनों में पेट्रोल बिक्री 14% और डीजल 18% बढ़ा, इंडियन ऑयल ने पैनिक बायिंग को बताया वजह
नई दिल्ली: मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान टकराव के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की मांग अचानक तेज हो गई है। इंडियन ऑयल के मुताबिक 1 से 22 मई 2026 के बीच देश में पेट्रोल की बिक्री 14 प्रतिशत और डीजल की बिक्री 18 प्रतिशत तक बढ़ गई है। तेल कंपनियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों और सप्लाई को लेकर लोगों की चिंता के कारण कई जगहों पर पैनिक बायिंग देखने को मिल रही है।
कंपनी ने हालांकि साफ किया है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है और सभी पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
मध्य-पूर्व संकट से बढ़ी चिंता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल संकट की बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से कार्गो जहाजों की आवाजाही प्रभावित होना माना जा रहा है। इसके कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है।
इसका असर सीधे क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ा है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा हो गया है। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक संकट का असर घरेलू बाजार पर भी तेजी से दिखाई दे रहा है।
इंडियन ऑयल ने क्या कहा?
इंडियन ऑयल ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि आम जनता को घबराने की जरूरत नहीं है। कंपनी के मुताबिक कुछ इलाकों में स्थानीय स्तर पर मांग और सप्लाई के असंतुलन के कारण पैनिक बायिंग देखी गई है।
कंपनी ने कहा कि देशभर में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार मौजूद है और सप्लाई सामान्य तरीके से जारी है।
क्यों बढ़ी पेट्रोल-डीजल की मांग?
इंडियन ऑयल ने मांग बढ़ने के पीछे कई वजहें गिनाई हैं। कंपनी के अनुसार इस समय harvesting period चलने के कारण डीजल की मांग सामान्य से ज्यादा है।
इसके अलावा कुछ निजी पेट्रोल पंपों पर ज्यादा कीमत होने के कारण ग्राहक सरकारी तेल कंपनियों के आउटलेट्स की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।
कंपनी ने यह भी कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय बाजार में bulk और institutional supply महंगी हो गई है, जिसके चलते वाणिज्यिक और संस्थागत ग्राहक भी PSU रिटेल आउटलेट्स से ईंधन खरीद रहे हैं।
सरकार ने घटाई थी एक्साइज ड्यूटी
तेल कंपनियों पर बढ़ते आयात बोझ को कम करने और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए केंद्र सरकार पहले ही पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर चुकी है।
सरकार ने 27 मार्च 2026 को पेट्रोल-डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी कम करने का फैसला लिया था। इसके अलावा डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क भी घटाया गया था।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा था कि मध्य-पूर्व संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में असामान्य तेजी आई है और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए केंद्र सरकार बोझ का एक हिस्सा खुद वहन कर रही है।
राज्य सरकारों पर बढ़ा दबाव
केंद्र सरकार की राहत के बावजूद राज्यों ने अब तक पेट्रोल और डीजल पर VAT या सेल्स टैक्स में कोई बड़ी कटौती नहीं की है।
राज्यों को पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाले VAT और सेल्स टैक्स से हर साल लाखों करोड़ रुपये की आय होती है। Petroleum Planning and Analysis Cell की रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्यों को POL प्रोडक्ट्स पर VAT और सेल्स टैक्स से 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई हुई थी।
वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में यह आंकड़ा 2.29 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा।
आगे और बढ़ सकती है चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य-पूर्व में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में संकट जारी रहा तो भारत में तेल की कीमतों और सप्लाई पर दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की मांग और कीमत दोनों में और तेजी देखने को मिल सकती है।



