नई स्टडी का दावा: सिगरेट-गांजा से सिकुड़ रहा दिमाग, याददाश्त और सोचने की क्षमता पर असर

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नई दिल्ली : सिगरेट और गांजा सेहत के लिए नुकसानदेह हैं, यह बात पहले से ही जानी जाती है, लेकिन एक नई रिसर्च ने इनके दिमाग पर पड़ने वाले गंभीर प्रभाव (cigarettes and marijuana) को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। “एसोसिएशंस ऑफ कैनाबिस” नामक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि तंबाकू और गांजे का सेवन दिमाग को समय से पहले बूढ़ा बना सकता है और उसके आकार को भी कम कर सकता है।

किंग्स कॉलेज लंदन और यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ के शोधकर्ताओं ने 72 हजार से अधिक लोगों पर आधारित करीब 100 अलग-अलग अध्ययनों का विश्लेषण किया। नतीजों में सामने आया कि यह केवल खराब आदत नहीं, बल्कि दिमाग की कार्यप्रणाली को बदलने वाला गंभीर जोखिम है।

दिमाग के इन हिस्सों पर पड़ता है असर और गांजा दिमाग के उन हिस्सों को नुकसान पहुंचाते हैं जो भावनाओं, याददाश्त और निर्णय क्षमता को नियंत्रित करते हैं।
इमोशन्स और डर (अमिगडाला): गांजा पीने वालों में यह हिस्सा छोटा पाया गया, जिससे डर, चिंता और कठिन फैसले लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
याददाश्त और सीखना (हिप्पोकैम्पस): तंबाकू का अधिक सेवन इस हिस्से को सिकोड़ देता है, जिससे याद रखने और सीखने की क्षमता कमजोर हो सकती है।
बॉडी अवेयरनेस (इंसुला): यह हिस्सा भूख, प्यास और दर्द का अहसास कराता है, जिस पर भी तंबाकू का नकारात्मक असर देखा गया।
ग्रे मैटर: तंबाकू के कारण दिमाग का ग्रे मैटर कम हो सकता है, जो सोचने-समझने और निर्णय लेने की मुख्य शक्ति माना जाता है।

अध्ययन में स्पष्ट हुआ कि जितना अधिक और लंबे समय तक सिगरेट पी जाती है, दिमाग के सिकुड़ने का खतरा उतना बढ़ता जाता है। विशेष रूप से हिप्पोकैम्पस पर इसका असर अधिक स्पष्ट पाया गया, जो धीरे-धीरे छोटा होता जाता है और याददाश्त कमजोर पड़ने लगती है।

वैज्ञानिकों के अनुसार तंबाकू या गांजा जलने पर धुएं में “रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीसीज” जैसे हानिकारक तत्व निकलते हैं। ये दिमाग में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन बढ़ाते हैं। इससे न्यूरॉन्स कमजोर होकर धीरे-धीरे नष्ट होने लगते हैं, जिससे दिमाग की कार्यक्षमता प्रभावित होती है।

रिसर्च मुख्य रूप से लंबे समय से सिगरेट पीने वालों पर आधारित थी, इसलिए कभी-कभार सेवन करने वालों में असर तुरंत दिखाई नहीं देता। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि दिमाग में होने वाले बदलाव धीरे-धीरे होते हैं और कई बार वर्षों बाद सामने आते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अब सिर्फ फेफड़ों या कैंसर ही नहीं, बल्कि ब्रेन हेल्थ को लेकर भी जागरूक होना जरूरी है। तंबाकू और गांजे का मिश्रित सेवन दिमाग पर और अधिक गंभीर प्रभाव डाल सकता है, जो आगे चलकर स्थायी नुकसान का कारण बन सकता है।