ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर, तेहरान ने ट्रंप को दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम—फ्रोजन संपत्ति जारी नहीं हुई तो सीजफायर खत्म करने की धमकी
तेहरान/वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच जारी शांति वार्ता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और दूसरे दौर की बातचीत की तारीख अभी तय नहीं हो सकी है। इसी बीच तेहरान ने अमेरिका को कड़ा अल्टीमेटम जारी करते हुए स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया है।
ईरान का आरोप—संपत्तियों की ब्लॉकेड से बढ़ा तनाव
ईरान का कहना है कि उसके बंदरगाहों पर अमेरिकी प्रतिबंध और लगभग 11 ट्रिलियन डॉलर की संपत्तियों को फ्रीज किए जाने के कारण हालात बिगड़े हैं। तेहरान ने इसे सीजफायर और वार्ता में रुकावट की मुख्य वजह बताया है।
विदेश मंत्री अब्बास अराघची का 48 घंटे का अल्टीमेटम
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि 48 घंटे के भीतर ईरानी संपत्तियों को जारी नहीं किया गया तो सीजफायर टूट सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य तब तक बंद रहेगा, जब तक फ्रोजन एसेट्स रिलीज नहीं की जातीं।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बड़ा बयान
अराघची के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य का संचालन तभी सामान्य होगा जब अमेरिका की ओर से ठोस प्रस्ताव सामने आएगा। उन्होंने दावा किया कि देरी की स्थिति में क्षेत्रीय शांति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
ट्रंप का बयान—“हमारे नियंत्रण में स्थिति”
वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिका स्थिति पर पूरी तरह नियंत्रण रखता है। ट्रंप ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी प्रभाव है और इसे खोलने या बंद रखने का फैसला हालात के अनुसार किया जाएगा।
ट्रंप ने यह भी कहा कि वे किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं हैं और अमेरिकी सैन्य बल पूरी तरह तैयार स्थिति में हैं। उनके अनुसार, जब तक कोई सकारात्मक समझौता नहीं होता, तब तक रणनीतिक निर्णय लागू रहेंगे।
संघर्ष और डील पर ट्रंप का दावा
ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ने अब तक अधिकांश सैन्य लक्ष्यों को हासिल कर लिया है और यदि बातचीत सफल नहीं होती है तो शेष लक्ष्यों को भी निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में दबाव उन देशों पर है जो समझौता नहीं कर रहे हैं।
क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका
ईरान की ओर से अल्टीमेटम और अमेरिका के सख्त रुख के चलते पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। दोनों देशों के बीच जारी यह गतिरोध आने वाले दिनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी बड़ा असर डाल सकता है।



