उम्र बढ़ने पर दिमाग को कमजोर होने से बचाना है तो अपनाएं ये 6 तरीके, न्यूरोसर्जन ने बताया आसान फॉर्मूला

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नई दिल्ली: उम्र बढ़ने के साथ शरीर की सेहत का ध्यान रखना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी दिमाग को स्वस्थ रखना भी है। मस्तिष्क का सीधा संबंध याददाश्त, भावनाओं, निर्णय लेने की क्षमता और रोजमर्रा की गतिविधियों से होता है। न्यूरोसर्जन डॉक्टर जय जगन्नाथ ने दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए छह आसान तरीके बताए हैं, जिन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाया जा सकता है।

ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखें

हाई ब्लड प्रेशर स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाने के साथ याददाश्त पर असर डाल सकता है और दिमाग की छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए रक्तचाप को नियंत्रित रखना दिमाग की सेहत के लिए भी जरूरी है। अगर रक्तचाप लगातार बढ़ा हुआ रहता है तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाओं और जीवनशैली में जरूरी बदलाव के जरिए इसे नियंत्रित करना चाहिए।

दिमाग को लगातार नई चुनौती दें

दिमाग को सक्रिय रखने के लिए कुछ नया सीखते रहना फायदेमंद हो सकता है। नई भाषा, कोई कौशल या वाद्य यंत्र सीखने जैसी गतिविधियां दिमाग में नए तंत्रिका संबंध बनाने में मदद कर सकती हैं। नियमित रूप से नई चीजें सीखने की आदत उम्र बढ़ने के साथ मस्तिष्क को सक्रिय रखने में मददगार हो सकती है।

एरोबिक और ताकत बढ़ाने वाली कसरत करें

नियमित शारीरिक गतिविधि दिमाग में रक्त प्रवाह को बेहतर बनाए रखने में मदद करती है। शारीरिक सक्रियता को संज्ञानात्मक क्षमता में गिरावट के कम जोखिम से भी जोड़ा गया है। अगर कोई व्यक्ति बहुत अधिक या कठिन व्यायाम नहीं कर सकता तो अपनी क्षमता के अनुसार रोजाना हल्की कसरत, पैदल चलना या अन्य शारीरिक गतिविधियां शुरू की जा सकती हैं।

नींद को नजरअंदाज न करें

पर्याप्त और गहरी नींद दिमाग की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है। नींद के दौरान मस्तिष्क की कोशिकाओं से चयापचय से जुड़े अपशिष्ट पदार्थों को साफ करने में मदद मिलती है और याददाश्त को मजबूत करने की प्रक्रिया भी बेहतर होती है। लगातार नींद पूरी न होने पर समय के साथ संज्ञानात्मक उम्र बढ़ने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

लोगों से जुड़े रहें

सामाजिक रूप से सक्रिय रहना भी दिमाग की सेहत के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। रोजाना बातचीत करना और करीबी लोगों के साथ संबंध बनाए रखना दिमाग के अलग-अलग हिस्सों को सक्रिय रखने वाली गतिविधियों से जुड़ा है। इसके विपरीत सामाजिक अलगाव को डिमेंशिया के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया है।

जरूरत पड़ने पर हेलमेट जरूर पहनें

सिर की चोटों से बचाव दिमाग को लंबे समय तक सुरक्षित रखने का एक अहम तरीका है। साइकिल चलाने, स्कीइंग या किसी खेल गतिविधि में हिस्सा लेने के दौरान हेलमेट पहनना चाहिए। ऐसी गतिविधियों में सिर की चोट के जोखिम को कम करने के लिए हेलमेट एक आसान और जरूरी सुरक्षा उपाय है।

डॉक्टर के मुताबिक, ऐसा कोई एक तरीका नहीं है जो संज्ञानात्मक क्षमता में गिरावट को पूरी तरह रोकने की गारंटी देता हो। हालांकि, लंबे समय तक स्वस्थ आदतों को अपनाने से रक्त वाहिकाओं की सेहत बनाए रखने, तंत्रिका विकास को बढ़ावा देने और उम्र बढ़ने के साथ संज्ञानात्मक क्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

 

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