G7 का सख्त संदेश: लेबनान में तुरंत लागू हो सीजफायर, हमले रोकने की संयुक्त मांग से बढ़ा वैश्विक दबाव
पेरिस: फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के अंतिम दिन सदस्य देशों ने लेबनान की स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए तत्काल और प्रभावी युद्धविराम की मांग की है। बुधवार को हुई बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में जी7 देशों ने क्षेत्र में शांति बहाल करने और हिंसा रोकने की अपील की।
संयुक्त बयान में कहा गया कि लेबनान में तुरंत और मजबूत सीजफायर लागू किया जाना चाहिए। इसके साथ ही लेबनान के नेतृत्व के उन प्रयासों का समर्थन भी जताया गया, जिनका उद्देश्य देश की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है।
लेबनान की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर
जी7 देशों ने अपने बयान में कहा कि लेबनान में हथियारों पर सरकार का पूर्ण नियंत्रण सुनिश्चित होना चाहिए। साथ ही ऐसी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता बताई गई, जिससे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप देश की स्थिरता और सुरक्षा को मजबूती मिल सके।
बयान में लेबनान की सरकार द्वारा राष्ट्रीय संस्थाओं को मजबूत करने और देश की अखंडता की रक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों को समर्थन देने की बात भी कही गई।
जी7 बैठक के बीच दक्षिणी लेबनान में हमला
सम्मेलन के दौरान ही दक्षिणी लेबनान में एक हमले की खबर सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक, इस हमले में चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। यह घटना ऐसे समय हुई जब दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता फ्रांस में वैश्विक सुरक्षा और क्षेत्रीय संकटों पर चर्चा कर रहे थे।
इस घटनाक्रम ने लेबनान में तत्काल युद्धविराम की मांग को और अधिक प्रासंगिक बना दिया है तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान एक बार फिर मध्य पूर्व की ओर केंद्रित कर दिया है।
PM मोदी ने भी उठाई स्थायी समाधान की मांग
जी7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी क्षेत्रीय संघर्षों के स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया। सम्मेलन में उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई मुलाकात भी चर्चा का प्रमुख विषय रही।
विश्लेषकों का मानना है कि मध्य पूर्व में स्थिरता को लेकर प्रमुख देशों के बीच बढ़ता संवाद आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कनाडा के प्रधानमंत्री बोले- गेमचेंजर साबित हो सकती है डील
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते को मध्य पूर्व में तनाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता केवल मौजूदा संकट तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कई वैश्विक मुद्दों पर नए दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि जी7 देशों के बीच यूक्रेन सहित कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर नई सोच के साथ चर्चा हुई है।
नाटो ने भी किया स्वागत
नाटो महासचिव मार्क रुटे ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि क्षेत्र में तनाव कम करने के प्रयास बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की योजना को बड़ा कदम बताया।
रुटे ने कहा कि फ्रांस और ब्रिटेन की अगुवाई में कई सहयोगी देश शांति स्थापना और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रयासों का समर्थन कर रहे हैं।
मध्य पूर्व में शांति पर दुनिया की नजर
जी7 देशों की संयुक्त अपील, नाटो का समर्थन और प्रमुख वैश्विक नेताओं के बयान इस बात का संकेत हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय लेबनान और व्यापक मध्य पूर्व क्षेत्र में स्थिरता चाहता है। हालांकि हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं, लेकिन कूटनीतिक प्रयासों ने शांति की संभावनाओं को नई गति दी है।



