खाद्य कीमतों ने बढ़ाई टेंशन! 3 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा FAO इंडेक्स, मौसम की मार से और महंगी हो सकती है थाली

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नई दिल्ली: खराब मौसम और खाड़ी तथा काला सागर क्षेत्र में जारी युद्ध के बीच दुनियाभर में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन के मुताबिक जुलाई 2026 में वैश्विक खाद्य मूल्य सूचकांक बढ़कर 131.1 अंक पर पहुंच गया। यह जनवरी 2023 के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर है। जून में यह सूचकांक 130.3 अंक था। ऐसे में आशंका बढ़ रही है कि दुनिया एक बार फिर खाद्य महंगाई के दबाव में आ सकती है।

एफएओ के मुख्य अर्थशास्त्री के मुताबिक ईरान और यूक्रेन में युद्ध के साथ अल-नीनो जैसी मौसम संबंधी परिस्थितियां लागत बढ़ाने और फसल उत्पादन घटाने का दबाव बना सकती हैं। इससे आने वाले समय में खाद्य महंगाई का जोखिम बढ़ सकता है। जुलाई में अनाज मूल्य सूचकांक में 3.4 फीसदी की मासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि गेहूं की कीमतें 5.8 फीसदी बढ़ीं। काला सागर क्षेत्र से निर्यात में रुकावट और प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में गर्मी से फसलों को नुकसान इसकी प्रमुख वजहों में शामिल रहा।

वनस्पति तेल और चीनी की कीमतों में भी उछाल

खाद्य महंगाई का दबाव केवल अनाज तक सीमित नहीं रहा। जुलाई में वनस्पति तेल मूल्य सूचकांक में 2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह जून 2022 के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। ईरान युद्ध और बायोडीजल की मजबूत मांग के बीच कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने पाम और सोया तेल के दाम को प्रभावित किया।

चीनी की कीमतों में भी जुलाई के दौरान 5.6 फीसदी की वृद्धि हुई। यूरोप और एशिया में मौसम संबंधी चिंताओं तथा ब्राजील में इथेनॉल की मांग बढ़ने की उम्मीदों को इसकी वजह बताया गया है। हालांकि, मांस की कीमतों में जून के रिकॉर्ड स्तर से 2.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

आम आदमी की थाली सालाना आधार पर 9 फीसदी तक महंगी

भारत में भी खाद्य वस्तुओं की कीमतों का असर आम आदमी की थाली पर दिखाई दिया है। प्याज, खाद्य तेल और रसोई गैस के दाम बढ़ने से जुलाई 2026 में थाली की लागत सालाना आधार पर 9 फीसदी तक बढ़ गई।

क्रिसिल इंटेलिजेंस की रोटी-राइस-रेट रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई में शाकाहारी थाली की कीमत करीब 4 फीसदी बढ़कर 29.1 रुपये हो गई, जबकि जुलाई 2025 में इसकी कीमत 28.1 रुपये थी। वहीं मांसाहारी थाली की कीमत 53.5 रुपये से बढ़कर 58.3 रुपये हो गई, यानी इसमें करीब 9 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।

प्याज और खाद्य तेल ने बढ़ाई रसोई की लागत

महाराष्ट्र में मार्च और अप्रैल के दौरान हुई बेमौसम बारिश से प्याज की फसल प्रभावित हुई। इसके चलते प्याज की कीमत में सालाना आधार पर 20 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। खाद्य तेल और रसोई गैस की कीमतें भी क्रमशः 11 फीसदी और 10 फीसदी बढ़ीं।

हालांकि, आलू और टमाटर की कीमतों में क्रमशः 12 फीसदी और 2 फीसदी की गिरावट ने उपभोक्ताओं को कुछ राहत दी। मांसाहारी थाली की महंगाई में चिकन की कीमतों की अहम भूमिका रही। चिकन के दाम सालाना आधार पर 14 फीसदी बढ़े। मांसाहारी थाली की लागत तय करने में चिकन की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी बताई गई है।

लगातार दूसरे महीने आरबीआई के लक्ष्य से ऊपर रह सकती है महंगाई

खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी के बीच जुलाई की खुदरा महंगाई बढ़ने का अनुमान है। 40 अर्थशास्त्रियों के सर्वे के मुताबिक जुलाई में खुदरा महंगाई 4.50 फीसदी तक पहुंच सकती है, जबकि जून में यह 4.38 फीसदी थी।

यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो खुदरा महंगाई लगातार दूसरे महीने भारतीय रिजर्व बैंक के 4 फीसदी के मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर रहेगी। जुलाई की खुदरा महंगाई के आधिकारिक आंकड़े 12 अगस्त को जारी किए जाएंगे।

मानसून से फसलों को मिली राहत, लेकिन खाद्य महंगाई पर नजर

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य आर्थिक सलाहकार कनिका पसरीचा के मुताबिक खाने-पीने की वस्तुओं की महंगाई बढ़ रही है, जबकि अन्य वस्तुओं की कीमतों का दबाव फिलहाल कम बना हुआ है। उन्होंने कहा कि जुलाई में मानसून की स्थिति बेहतर रहने से फसलों को फायदा हुआ है।

इसके बावजूद वैश्विक स्तर पर मौसम, युद्ध और खाद्य आपूर्ति से जुड़े जोखिम बने हुए हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में खाद्य वस्तुओं की कीमतों और आम आदमी की रसोई पर पड़ने वाले असर पर लगातार नजर बनी रहेगी।

 

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