परमाणु ऊर्जा पर केंद्र का बड़ा दांव, 6 परियोजनाओं के लिए ₹13,355 करोड़ मंजूर
नई दिल्ली: देश में परमाणु ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा वित्तीय कदम उठाया है। परमाणु ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में निर्माणाधीन छह परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 13,355 करोड़ रुपये की इक्विटी मंजूर की गई है। सरकार की ओर से स्वीकृत पूरी राशि का इस्तेमाल भी किया जा चुका है।
केंद्रीय परमाणु ऊर्जा राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन परियोजनाओं के निर्माण और उन्हें शुरू करने की प्रक्रिया में तकनीकी, आपूर्ति से जुड़ी और वैश्विक परिस्थितियों से संबंधित कई चुनौतियों के कारण देरी हुई है।
फुकुशिमा के बाद डिजाइन में बदलाव, कोरोना से भी प्रभावित हुआ काम
परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में देरी के पीछे कई कारण सामने आए हैं। जापान में हुई फुकुशिमा परमाणु दुर्घटना के बाद सुरक्षा मानकों के अनुरूप परियोजनाओं के डिजाइन में बड़े बदलाव करने पड़े। इसके अलावा जरूरी उपकरणों की आपूर्ति में देरी और कोविड-19 महामारी के कारण भी निर्माण कार्य प्रभावित हुआ।
मंत्रालय के मुताबिक रूस से उपकरणों की आपूर्ति में आई दिक्कतों का भी परियोजनाओं पर असर पड़ा। कोरोना महामारी के बाद ठेकेदारों के सामने आई वित्तीय परेशानियां, कठिन मिट्टी की स्थिति और कुशल श्रमिकों की कमी ने भी निर्माण की गति को प्रभावित किया। रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण आपूर्ति व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।
परियोजनाओं की लगातार हो रही उच्चस्तरीय समीक्षा
परियोजनाओं में हो रही देरी को दूर करने के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग और एनपीसीआईएल की ओर से लगातार उच्चस्तरीय समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों को परियोजनाओं की प्रगति पर नियमित नजर रखने और सामने आने वाली समस्याओं का समय रहते समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्माण कार्यों में तेजी लाने के लिए वेंडर्स के साथ नियमित बैठकें भी की जा रही हैं। अधिकारियों को अतिरिक्त अधिकार देने के साथ परियोजनाओं की निगरानी के लिए बोर्ड सब-कमेटी का गठन किया गया है।
एक साथ बड़े ऑर्डर से उपकरणों की आपूर्ति बेहतर करने की तैयारी
आने वाली परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में उपकरणों की आपूर्ति में देरी रोकने के लिए सरकार ने फ्लीट मोड में बड़े पैमाने पर एक साथ ऑर्डर देने की रणनीति अपनाई है। इसके तहत कई रिएक्टरों के लिए जरूरी उपकरणों की खरीद और आपूर्ति को पहले से व्यवस्थित करने की कोशिश की जा रही है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य परियोजनाओं की जरूरत के मुताबिक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और निर्माण कार्य के दौरान आपूर्ति से जुड़ी बाधाओं को कम करना है।
छह परियोजनाओं से ग्रिड में जुड़ेगी 8,000 मेगावाट क्षमता
केंद्र सरकार के मुताबिक, निर्माणाधीन इन छह परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के क्रमिक रूप से शुरू होने के बाद राष्ट्रीय बिजली ग्रिड में कुल 8,000 मेगावाट क्षमता जुड़ जाएगी।
सरकार को उम्मीद है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता मजबूत होगी और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े लक्ष्यों को गति मिलेगी। इसके साथ ही परमाणु ऊर्जा से लगातार बिजली उत्पादन की क्षमता बढ़ने पर भविष्य में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने में भी मदद मिल सकती है।





