ईंधन बचत पर सख्त हुईं बीजेपी सरकारें, PM मोदी की अपील के बाद पांच राज्यों में बड़े फैसले लागू
नई दिल्ली : देश में बढ़ते ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच अब केंद्र और राज्य सरकारें ईंधन बचत को लेकर सक्रिय नजर आ रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल-डीजल (Petrol and Diesel) बचाने की अपील के बाद बीजेपी शासित कई राज्यों ने इसे अभियान के रूप में लागू करना शुरू कर दिया है। सरकारी काफिलों में कटौती से लेकर कारपूलिंग और ऑनलाइन बैठकों तक, कई अहम फैसले लिए गए हैं।
दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में सरकारों ने अलग-अलग स्तर पर निर्देश जारी किए हैं। इन कदमों का उद्देश्य ईंधन की खपत कम करना और भविष्य में संभावित संकट से निपटने की तैयारी करना है। दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सरकारी विभागों में वाहनों के इस्तेमाल को सीमित करने का फैसला लिया है। अब मंत्री, विधायक और अधिकारी जरूरत के मुताबिक कम से कम वाहनों का उपयोग करेंगे। साथ ही कारपूलिंग और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या कम करने का आदेश दिया है। उन्होंने फालतू वाहनों के इस्तेमाल पर रोक लगाने के साथ सभी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को सादगी अपनाने और ईंधन बचाने की सलाह दी है।
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिले में 50 प्रतिशत तक वाहनों की कटौती के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा मेट्रो, बस, सीएनजी, इलेक्ट्रिक वाहन, साइकिल और कारपूलिंग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। सरकार ने ऑनलाइन बैठकों को प्राथमिकता देने और कुछ संस्थानों में सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू करने की सलाह भी दी है, ताकि यात्रा कम हो और ईंधन की बचत हो सके।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने काफिले की गाड़ियों की संख्या 13 से घटाकर 8 कर दी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित में पेट्रोल-डीजल की बचत जरूरी है। साथ ही मंत्रियों और निगम-मंडल पदाधिकारियों से सादगी अपनाने की अपील की गई है।
कई राज्यों में अब ‘नो व्हीकल डे’ लागू करने, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और स्कूल बसों के बेहतर उपयोग जैसे सुझावों पर भी विचार किया जा रहा है। इसके अलावा दफ्तरों में अलग-अलग समय पर काम शुरू करने की योजना पर भी चर्चा हो रही है, ताकि ट्रैफिक और ईंधन की खपत कम की जा सके।



