ट्रंप के बयान से तेल बाजार को बड़ी राहत, ब्रेंट 84 डॉलर से नीचे फिसला; कच्चे तेल में करीब 5% की गिरावट
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीद के बीच अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमलों पर रोक लगाने के संकेत देने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज नरमी देखने को मिली। ट्रंप ने दावा किया कि क्षेत्र में संघर्ष समाप्त करने को लेकर समझौता लगभग तय हो चुका है, जिसके बाद वैश्विक तेल बाजार में बिकवाली बढ़ गई।
ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों में तेज गिरावट
रविवार रात कारोबार के दौरान अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत करीब 5 प्रतिशत गिरकर 80.79 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड भी लगभग 5 प्रतिशत टूटकर 83.87 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। हालांकि मौजूदा कीमतें अभी भी संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर की तुलना में करीब 20 प्रतिशत अधिक बनी हुई हैं।
कई महीनों से बनी हुई थी अस्थिरता
अमेरिका और इजराइल की ओर से फरवरी के अंत में ईरान के खिलाफ कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार लगातार उतार-चढ़ाव का सामना कर रहा है। इस दौरान कई मौकों पर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर भी पहुंच गई थीं।
तनाव घटने से सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में संघर्ष समाप्त होता है तो फारस की खाड़ी से तेल की आपूर्ति फिर सामान्य हो सकती है। पिछले कई महीनों से सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण तेल और अन्य सामान ले जाने वाले टैंकरों की आवाजाही प्रभावित रही, जिसका असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भी पड़ा।
महंगे तेल का महंगाई पर पड़ा असर
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन की लागत पर भी देखने को मिला। कई देशों में परिवहन खर्च बढ़ा, हवाई किराए महंगे हुए और कुछ क्षेत्रों में ईंधन की कमी जैसी स्थिति भी सामने आई।
ऊर्जा कंपनियों को मिला था फायदा
तेल की ऊंची कीमतों के दौरान ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों को बेहतर मुनाफा हुआ। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं के चलते वैश्विक बाजार में ईंधन महंगा हुआ, जिससे तेल और गैस कंपनियों को लाभ मिला।
भारत में तुरंत क्यों नहीं घटते पेट्रोल-डीजल के दाम?
विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का असर भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों पर तुरंत नहीं पड़ता। इसकी वजह यह है कि खुदरा ईंधन कीमतें तय करते समय तेल कंपनियां केवल कच्चे तेल की कीमत ही नहीं, बल्कि रुपया-डॉलर विनिमय दर, रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च और केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए करों सहित कई अन्य कारकों को भी ध्यान में रखती हैं।





