बांग्लादेश ने अपने पहले परमाणु ऊर्जा संयंत्र में यूरेनियम ईंधन लोडिंग की प्रक्रिया की शुरू
ढाका : बांग्लादेश मंगलवार को अपने पहले परमाणु ऊर्जा संयंत्र रूपपुर में यूरेनियम ईंधन लोड करने की ऐतिहासिक प्रक्रिया शुरू कर दिया है। यह देश के ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर है, जो 2400 मेगावाट क्षमता वाले इस प्लांट के जरिए देश की कुल बिजली मांग का करीब 10 प्रतिशत पूरा करने की राह खोलेगा। ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, 2400 मेगावाट क्षमता वाले रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र में ईंधन भरने का कार्यक्रम मूल रूप से 7 अप्रैल को प्रस्तावित था, लेकिन नियामक मंजूरियों और सुरक्षा संबंधी कुछ अनसुलझे मुद्दों के कारण कई बार टाल दिया गया था।
ईंधन लोडिंग समारोह में बांग्लादेशी और रूसी अधिकारियों ने भाग लिया। समारोह के दौरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी का रिकॉर्डेड संदेश भी सुनाया और दिखाया गया, जिसमें उन्होंने इस मील के पत्थर के लिए बांग्लादेश को बधाई दी। रूस द्वारा वित्तपोषित और तकनीकी सहयोग से बनाया जा रहा रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र बांग्लादेश की अब तक की सबसे बड़ी ऊर्जा परियोजना है, जिसका निर्माण कार्य 2017 में शुरू हुआ था।
अधिकारियों के मुताबिक, अगस्त तक संयंत्र से लगभग 300 मेगावाट बिजली उत्पादन शुरू हो जाने की उम्मीद है, जबकि पूर्ण उत्पादन 2027 के अंत तक शुरू हो जाएगा। संयंत्र में दो इकाइयां हैं, प्रत्येक की क्षमता 1200 मेगावाट है। पहली इकाई का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि दूसरी इकाई का काम 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत में पूरा होने की संभावना है। प्रधानमंत्री के सूचना एवं प्रसारण सलाहकार जाहिद उर रहमान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह परियोजना बांग्लादेश की कुल बिजली मांग का 10 प्रतिशत पूरा करेगी और लगभग 20 लाख लोगों को सीधा लाभ पहुंचाएगी।
बता दें कि बांग्लादेश इस समय गंभीर ऊर्जा चुनौतियों का सामना कर रहा है। देश का बिजली ग्रिड हर साल गर्मी के मौसम में भारी दबाव में आ जाता है। इस बार पश्चिम एशिया में ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण स्थिति और बिगड़ गई है। बांग्लादेश अपनी तेल और गैस की 95 प्रतिशत जरूरतें आयात से पूरी करता है, जिनमें अधिकांश आपूर्ति मध्य पूर्व से होती है। फरवरी के अंत में शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के बाद होर्मुज स्ट्रेट से ऊर्जा शिपमेंट बाधित हो गए हैं।



