भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार से दुनिया हैरान! अमीर देशों से तेजी से घट रहा आय का अंतर, दक्षिण कोरियाई विशेषज्ञ ने बताई बड़ी वजह

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नई दिल्ली: वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रगति को लेकर दक्षिण कोरिया के एक अर्थशास्त्री ने सकारात्मक आकलन पेश किया है। कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक पॉलिसी में भारत और दक्षिण एशिया टीम के प्रमुख क्युंगहून किम के मुताबिक, भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी में लंबे समय के दौरान उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उनके अनुसार, भारत न केवल निम्न आय वाले देशों से आगे बढ़ा है, बल्कि मध्यम और उच्च आय वाली अर्थव्यवस्थाओं के साथ अपना अंतर भी कम कर रहा है।

जीवन स्तर में सुधार को मानना होगा असली प्रगति

क्युंगहून किम ने कहा कि किसी देश की आर्थिक स्थिति का आकलन केवल इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि वह आज कितना गरीब या अमीर है। यह देखना भी जरूरी है कि वहां लोगों का जीवन स्तर कितनी तेजी से बेहतर हो रहा है और देश दूसरी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले कितनी प्रगति कर रहा है।

उन्होंने भारत की बढ़ती प्रति व्यक्ति आय और गरीबी में आई गिरावट को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। किम ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए गए अपने विचारों में कहा कि भारत की मध्यम अवधि की विकास संभावनाओं को लेकर सवाल उठाने वालों को देश में हो रहे बदलावों पर भी ध्यान देना चाहिए।

प्रति व्यक्ति जीडीपी में कितना हुआ इजाफा?

किम के साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी 2,702 डॉलर रही। क्रय शक्ति समता यानी पीपीपी के आधार पर समायोजन करने पर यह आंकड़ा 11,784 डॉलर था। ऐतिहासिक तुलना के लिए 2021 की स्थिर पीपीपी कीमतों पर आधारित आंकड़े का इस्तेमाल किया गया, जिसके अनुसार 2025 में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी 10,039 डॉलर थी।

इन आंकड़ों के आधार पर अर्थशास्त्री ने बताया कि पिछले कुछ दशकों में भारत की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय बदलाव आया है। खास तौर पर पिछले एक दशक के दौरान प्रति व्यक्ति जीडीपी के स्तर में सुधार अधिक स्पष्ट दिखाई दिया है।

निम्न आय वाले देशों के औसत से चार गुना आगे भारत

क्युंगहून किम के मुताबिक, विश्व बैंक ने भारत को वर्ष 2007 तक निम्न आय वाले देशों की श्रेणी में रखा था। वर्ष 1990 में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी निम्न आय वाले देशों के औसत से केवल 15 प्रतिशत अधिक थी। लेकिन 2025 तक यह अंतर बढ़कर चार गुने से भी अधिक हो गया।

वहीं, मध्यम आय वाले देशों की औसत प्रति व्यक्ति जीडीपी के मुकाबले भारत का स्तर 64 प्रतिशत तक पहुंच गया। इस श्रेणी में चीन और वियतनाम जैसी तेजी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्थाएं भी शामिल हैं। किम के आकलन के अनुसार, भारत की प्रगति को इन देशों के साथ तुलना करके भी समझा जा सकता है।

अमीर देशों के साथ आय का अंतर भी हो रहा कम

दक्षिण कोरियाई अर्थशास्त्री ने कहा कि उच्च आय वाले देशों की तुलना में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी का अनुपात लगातार बढ़ा है। वर्ष 1990 में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी उच्च आय वाली अर्थव्यवस्थाओं के औसत का केवल 6 प्रतिशत थी। वर्ष 2025 तक यह बढ़कर 17 प्रतिशत हो गई।

हालांकि, किम ने यह भी स्पष्ट किया कि इस बदलाव के पीछे केवल भारत की आर्थिक प्रगति ही नहीं, बल्कि कई धनी देशों की धीमी विकास दर भी एक कारण रही है। उनके मुताबिक, भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी अब वैश्विक औसत के करीब आधे स्तर तक पहुंच रही है, जबकि 1990 में यह दुनिया के औसत का लगभग पांचवां हिस्सा थी।

गरीबी में 62.7 करोड़ की कमी का दावा

किम ने भारत की आर्थिक प्रगति के साथ गरीबी में आई कमी को भी अहम उपलब्धि बताया। उनके अनुसार, देश में गरीबी में रहने वाले लोगों की संख्या में लगभग 62.7 करोड़ की गिरावट आई है।

उन्होंने बताया कि प्रतिदिन 4.40 डॉलर की गरीबी रेखा के आधार पर भारत की गरीबी दर वर्ष 2004 में 73 प्रतिशत थी, जो 2023 में घटकर 14 प्रतिशत रह गई। करीब 1.4 अरब की आबादी वाले देश के लिए इस बदलाव को उन्होंने विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया।

भारत की विकास संभावनाओं को लेकर क्या है आकलन?

क्युंगहून किम ने कहा कि भारत के सामने अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं, लेकिन देश की आर्थिक प्रगति और मध्यम अवधि में विकास की संभावनाएं सकारात्मक हैं। उनके मुताबिक, भारत निम्न आय वाले देशों से आगे निकल रहा है और मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं के औसत के करीब पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि विकासशील देशों का अमीर अर्थव्यवस्थाओं के बराबर पहुंचना अपने आप नहीं होता। इसके लिए लगातार आर्थिक प्रगति और बेहतर नीतियों की जरूरत होती है। भारत के संदर्भ में उन्होंने विशेष रूप से पिछले दशक के दौरान हुए बदलावों को उल्लेखनीय बताया।

 

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