भारत की बड़ी छलांग! 35 साल बाद जापान ने दी ‘A-’ रेटिंग, दुनिया में बढ़ी आर्थिक साख; जानिए आम आदमी और निवेश को कैसे होगा फायदा
नई दिल्ली: भारत की आर्थिक साख को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। जापान की साख निर्धारण एजेंसी जेसीआर ने 35 साल से ज्यादा समय बाद भारत की रेटिंग एक पायदान बढ़ाकर ‘ए-’ कर दी है। एजेंसी ने रेटिंग का परिदृश्य स्थिर रखा है। रेटिंग बढ़ाने के पीछे भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि और वित्तीय स्थिति में सुधार को प्रमुख वजह बताया गया है।
जापानी एजेंसी के मुताबिक 140 करोड़ से अधिक आबादी और मौजूदा कीमतों पर 3.9 लाख करोड़ डॉलर की जीडीपी वाली भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष में भी छह प्रतिशत से अधिक की ऊंची वृद्धि दर बनाए रख सकती है। निजी खपत और निवेश के मजबूत समर्थन के चलते भारत की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ वर्षों से तेज गति से आगे बढ़ रही है।
35 साल बाद फिर ‘A’ श्रेणी में भारत
15वें वित्त आयोग के चेयरमैन एनके सिंह ने कहा कि 35 से अधिक वर्षों के बाद भारत को फिर ‘ए’ रेटिंग मिली है। उन्होंने इसे भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, संरचनात्मक सुधारों और केंद्र-राज्य साझेदारी की मजबूती की मान्यता बताया। इससे पहले भारत को ‘ए’ श्रेणी की रेटिंग मूडीज ने 1988 में ए2 दी थी। हालांकि, 1990-91 के भुगतान संतुलन संकट के दौरान यह रेटिंग खत्म हो गई थी।
रेटिंग बढ़ने से आम आदमी को क्या फायदा?
रेटिंग बढ़ने का सीधा असर आम आदमी की जेब पर तुरंत दिखाई नहीं देगा, लेकिन अर्थव्यवस्था के जरिए धीरे-धीरे इसका फायदा मिल सकता है। बेहतर साख के कारण भारतीय कंपनियों के लिए विदेशों से कर्ज लेना सस्ता होने की संभावना रहती है। इसका सकारात्मक असर आगे चलकर होम लोन, कार लोन और कारोबार के लिए मिलने वाले कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ सकता है।
इसके साथ ही भारत में विदेशी निवेश बढ़ने की उम्मीद भी है। ज्यादा निवेश से कारखानों और नए कारोबार के विस्तार को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
बेल्जियम के साथ व्यापार और निवेश पर बढ़ेगा जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को भारत दौरे पर आए बेल्जियम के प्रधानमंत्री बर्ट दे वेवर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। बातचीत में व्यापार और निवेश बढ़ाने पर विशेष जोर रहने की उम्मीद है। ऊर्जा, रक्षा, जलवायु परिवर्तन और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में भी कई समझौते होने की संभावना है।
यूरोपीय संघ के सदस्य के तौर पर बेल्जियम भारत के लिए व्यापार और निवेश की दृष्टि से महत्वपूर्ण देश है। बेल्जियम के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा दो दशक के अंतराल के बाद हो रही है। इससे दोनों देशों के संबंधों में नए दौर की शुरुआत की उम्मीद जताई जा रही है।
रक्षा क्षेत्र में भी समझौते की उम्मीद
बेल्जियम के प्रधानमंत्री के साथ वहां के रक्षा और विदेश व्यापार मंत्री भी भारत आए हैं। दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सह-उत्पादन को लेकर कुछ समझौते होने की संभावना है। पिछले वर्ष अलग-अलग क्षेत्रों में 40 से अधिक समझौते हुए थे। बेल्जियम उन यूरोपीय देशों में शामिल है, जिसने भारत की आजादी के तुरंत बाद उसके साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में बेल्जियम की यात्रा की थी।
भारत-बेल्जियम व्यापार 13 अरब डॉलर
भारत और बेल्जियम के बीच मौजूदा सालाना व्यापार करीब 13 अरब डॉलर है। हाल में यूरोपीय संघ के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ने की उम्मीद है। बेल्जियम भारत में विदेशी निवेश के महत्वपूर्ण स्रोतों में भी शामिल है।
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2000 से 2025 के बीच बेल्जियम से भारत में 4.2 अरब डॉलर का निवेश आया। अब भारत की बेहतर आर्थिक साख और व्यापारिक अवसरों के बीच इस निवेश में और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।





