अमेरिका का भारत पर बड़ा आरोप, कहा- चीन को टैरिफ से बचाने में मदद कर रहा भारत
वाशिंगटन: अमेरिका ने टैरिफ के मुद्दे पर एक बार फिर भारत को लेकर गंभीर आरोप लगाया है। अमेरिका का दावा है कि भारत समेत 40 से अधिक देश चीन को अमेरिकी टैरिफ से बचने में मदद कर रहे हैं। यह आरोप व्हाइट हाउस के शीर्ष व्यापार सलाहकार पीटर नवारो की रिपोर्ट ‘द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम’ में लगाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका अब ऐसे संदिग्ध व्यापारिक रास्तों की पहचान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत समेत 40 से ज्यादा देश चीन के लिए एक ‘शैडो ट्रांस-शिपमेंट नेटवर्क’ की तरह काम कर रहे हैं। अमेरिकी रिपोर्ट के अनुसार इस नेटवर्क के जरिए हर साल 40 अरब डॉलर से लेकर 303 अरब डॉलर तक के चीनी सामान को दूसरे देशों के रास्ते अमेरिकी बाजार में पहुंचाया जा रहा है।
पीटर नवारो ने तीसरे देशों के इस्तेमाल का लगाया आरोप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो का आरोप है कि चीन अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए तीसरे देशों का इस्तेमाल कर रहा है। इस सूची में भारत के अलावा मेक्सिको, कनाडा, यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया का भी नाम लिया गया है।
नवारो ने पत्रकारों के सामने अपनी रिपोर्ट का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि वर्षों से चल रहा यह ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क चीन को 40 से अधिक देशों के जरिए अपने निर्यात को दूसरे देशों के सामान के तौर पर अमेरिकी बाजार तक पहुंचाने का रास्ता देता है। उनके मुताबिक इससे चीनी कंपनियों को अमेरिका की ओर से लगाए गए ऊंचे टैरिफ से बचने में मदद मिलती है।
भारत को लेकर रिपोर्ट में क्या दावा किया गया?
अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक चीन अपने उत्पादों को तीसरे देशों में भेजकर उनकी मामूली प्रोसेसिंग, दोबारा पैकेजिंग या लेबल बदलने जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर सकता है। इसके अलावा सामान के मार्ग में बदलाव करके भी उसे अलग देश के उत्पाद के तौर पर पेश किए जाने का आरोप लगाया गया है।
अमेरिका का कहना है कि इस तरह के तरीकों से चीनी सामान पर लागू भारी टैरिफ से बचने की कोशिश की जाती है। पीटर नवारो ने भारत के पुणे-गुजरात-चेन्नई उत्पादन क्षेत्र का भी उल्लेख किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस क्षेत्र में चीन से आए पंप और कंप्रेसर को भारतीय उत्पाद के तौर पर अमेरिकी बाजार में भेजा जा सकता है।
टैरिफ चोरी पकड़ने के लिए AI का इस्तेमाल करेगा अमेरिका
अमेरिका संदिग्ध शिपमेंट की पहचान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ‘डिटेक्टिव बॉर्डर’ प्रणाली का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है। यह प्रणाली शिपमेंट से जुड़े आंकड़ों, सामान के मार्ग, उत्पाद की श्रेणी, कंपनियों के स्वामित्व संबंधों और उत्पादन क्षमता जैसे कई पहलुओं का विश्लेषण करेगी।
रिपोर्ट के मुताबिक इस तकनीक का उद्देश्य संदिग्ध सामान की पहचान करना है। जरूरत पड़ने पर ऐसे मामलों में कार्रवाई, शुल्क की वसूली, जुर्माना लगाने या अमेरिकी बाजार में सामान के प्रवेश पर रोक जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।





