ड्रग्स तस्करी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- सभी एजेंसियां मिलकर करें कार्रवाई; केंद्र और राज्यों को नोटिस

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नई दिल्ली: देश में बढ़ती मादक पदार्थों की तस्करी पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस गंभीर खतरे से निपटने के लिए विशेषज्ञ एजेंसियों को अलग-अलग नहीं, बल्कि साझा प्रयास के साथ काम करना होगा। मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया है।

सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। पीठ ने कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी बेहद गंभीर समस्या है और इससे प्रभावी तरीके से निपटने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय जरूरी है।

2025 में ड्रग्स से जुड़े मामलों में 53 फीसदी बढ़ोतरी का दावा

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में दावा किया गया है कि देश में नशीले पदार्थों का दुरुपयोग और तस्करी खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है। याचिका के अनुसार, वर्ष 2025 में ड्रग्स से जुड़े मामलों में 53 फीसदी की वृद्धि हुई और 1,240 टन नशीले पदार्थ जब्त किए गए। याचिकाकर्ता ने कहा है कि ये आंकड़े समस्या के बढ़ते दायरे को दर्शाते हैं।

याचिका में यह भी कहा गया है कि नशीले पदार्थों की लत का असर केवल संबंधित व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे परिवार भी प्रभावित होते हैं। मौजूदा व्यवस्था में जांच के लिए एक समान नियमों की कमी, फॉरेंसिक जांच में देरी और विभिन्न जांच एजेंसियों के बीच पर्याप्त तालमेल नहीं होने से मामलों की जांच और सुनवाई प्रभावित हो रही है।

पंजाब में विदेशों से ड्रग्स पहुंचने का मुद्दा उठा

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने विदेशों से पंजाब में नशीले पदार्थों की तस्करी का मुद्दा उठाया। वहीं न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और ‘स्वर्ण अर्धचंद्र’ क्षेत्र से देश की निकटता के संदर्भ में ड्रग्स तस्करी के सीमा पार पहलू पर ध्यान दिलाया।

पीठ ने इस संदर्भ में अफगानिस्तान और म्यांमार का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि सीमा पार से होने वाली तस्करी का यह पहलू उसके सामने उठाए गए मुद्दे से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।

याचिका में जांच से पुनर्वास तक कई मांगें

अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से दाखिल जनहित याचिका में मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में जांच, अभियोजन, सजा और पुनर्वास व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई निर्देश देने की मांग की गई है।

याचिका में नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों की तय समय-सीमा में जांच और सुनवाई के लिए पूरे देश में एक समान जांच प्रक्रिया लागू करने की मांग की गई है। इसके अलावा ड्रग्स तस्करी से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर उन्हें समयबद्ध तरीके से जब्त करने का भी अनुरोध किया गया है।

फॉरेंसिक रिपोर्ट और तलाशी की प्रक्रिया के लिए तय समय सीमा की मांग

याचिकाकर्ता ने फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट जमा करने के लिए अनिवार्य समय सीमा तय करने की मांग की है। साथ ही मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में तलाशी, जब्ती और नमूने लेने की प्रक्रिया के लिए पूरे देश में एक समान मानक संचालन प्रक्रिया लागू करने का आग्रह किया गया है।

याचिका में इन प्रक्रियाओं की अनिवार्य डिजिटल रिकॉर्डिंग और वीडियोग्राफी कराने की मांग भी की गई है, ताकि जांच की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।

विशेष अदालतों के गठन की भी मांग

याचिका में मादक पदार्थों से जुड़े मामलों की जांच और सुनवाई में तेजी लाने के लिए एनडीपीएस अधिनियम की धारा 36 और 36ए के तहत विशेष अदालतों के गठन की मांग की गई है। इसके साथ ही नए मनोप्रभावी पदार्थों की पहचान करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें समय रहते प्रतिबंधित सूची में शामिल करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का अनुरोध किया गया है।

याचिकाकर्ता ने कहा है कि एक समान जांच मानकों की कमी, फॉरेंसिक रिपोर्ट में देरी, विशेष अदालतों की अपर्याप्त संख्या और पुनर्वास के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे की कमी के कारण एनडीपीएस अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू करने में परेशानी हो रही है।

ड्रग्स तस्करी को संगठित अपराध और आतंकी वित्तपोषण से जोड़ा

याचिका में कहा गया है कि मादक पदार्थों की तस्करी का असर देशभर में सार्वजनिक स्वास्थ्य और परिवारों पर पड़ता है। इसके अलावा यह संगठित अपराध और आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण को भी बढ़ावा दे सकती है। याचिकाकर्ता ने ऐसे मामलों में जांच, अभियोजन, सजा और पुनर्वास के लिए समन्वित राष्ट्रीय व्यवस्था तैयार करने की जरूरत बताई है।

 

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