ITR भरने की कल आखिरी तारीख! जानिए किन लोगों के लिए इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करना है जरूरी

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नई दिल्ली: अगर आपने अभी तक वित्त वर्ष से संबंधित अपना इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) दाखिल नहीं किया है, तो अब देरी न करें। जिन करदाताओं को टैक्स ऑडिट कराने की आवश्यकता नहीं है, उनके लिए 31 जुलाई 2026 आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तिथि है। समय पर रिटर्न दाखिल करने से टैक्स रिकॉर्ड सही रहता है, अतिरिक्त कटे टैक्स का रिफंड मिलने में आसानी होती है और विलंब शुल्क जैसी परेशानियों से बचा जा सकता है।

ऐसे में यह जानना जरूरी है कि अंतिम तिथि किन लोगों पर लागू होती है, किन करदाताओं के लिए आईटीआर दाखिल करना आवश्यक है, कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए और सही आईटीआर फॉर्म का चयन कैसे किया जाए।

क्या होता है आईटीआर?

आईटीआर यानी इनकम टैक्स रिटर्न वह विवरण है, जिसके माध्यम से करदाता आयकर विभाग को अपनी पूरे वित्त वर्ष की आय, चुकाए गए टैक्स और स्रोत पर कटे टैक्स की जानकारी देता है। यदि निर्धारित टैक्स से अधिक राशि कट चुकी हो तो इसी प्रक्रिया के जरिए रिफंड का दावा भी किया जाता है।

31 जुलाई की अंतिम तिथि किन लोगों के लिए है?

31 जुलाई 2026 की अंतिम तिथि उन करदाताओं के लिए निर्धारित है जिन्हें टैक्स ऑडिट कराने की जरूरत नहीं होती। इसमें मुख्य रूप से वेतनभोगी कर्मचारी, पेंशनभोगी और छात्र शामिल हैं।

वहीं, जिन लोगों की आय व्यवसाय या पेशे से है और जिन्हें आईटीआर-3 या आईटीआर-4 दाखिल करना होता है, उनके लिए अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है।

किन लोगों को आईटीआर दाखिल करना चाहिए?

इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करना उन लोगों के लिए आवश्यक माना जाता है जिनके पास भारत या विदेश में मकान, जमीन या अन्य अचल संपत्ति है। इसके अलावा शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या ईएसओपी में निवेश करने वाले, बैंक खातों में निर्धारित सीमा से अधिक नकदी जमा करने वाले, एक लाख रुपये से अधिक का वार्षिक बिजली बिल चुकाने वाले, विदेश यात्रा पर दो लाख रुपये से अधिक खर्च करने वाले तथा 60 लाख रुपये से अधिक वार्षिक कारोबार वाले लोगों को भी आईटीआर दाखिल करना चाहिए।

रिटर्न भरने से पहले तैयार रखें ये जरूरी दस्तावेज

आईटीआर दाखिल करने से पहले फॉर्म-16, फॉर्म-26एएस, वार्षिक सूचना विवरण (एआईएस), करदाता सूचना सारांश (टीआईएस), बैंक स्टेटमेंट, ब्याज का विवरण, शेयर, म्यूचुअल फंड या संपत्ति की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज, धारा 80सी और 80डी सहित टैक्स बचत के प्रमाण, होम लोन या किराये से जुड़े दस्तावेज, पैन, आधार और सही बैंक खाते की जानकारी तैयार रखना जरूरी है।

फॉर्म-16 नियोक्ता से प्राप्त किया जा सकता है, जबकि एआईएस और टीआईएस आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड किए जा सकते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि केवल फॉर्म-16 के आधार पर आईटीआर दाखिल न करें, बल्कि फॉर्म-26एएस, एआईएस और टीआईएस से सभी जानकारियों का मिलान अवश्य करें, ताकि किसी आय या टीडीएस की जानकारी छूटने की संभावना न रहे।

किसे कौन-सा आईटीआर फॉर्म भरना चाहिए?

आईटीआर-1 (सहज) उन करदाताओं के लिए है जिनकी कुल आय 50 लाख रुपये तक है और आय वेतन, पेंशन, एक मकान, ब्याज, लाभांश या सीमित कृषि आय से होती है।

आईटीआर-2 उन लोगों के लिए है जो आईटीआर-1 के पात्र नहीं हैं, लेकिन उनकी आय व्यवसाय या पेशे से नहीं होती।

आईटीआर-3 व्यवसाय या पेशे से आय अर्जित करने वाले करदाताओं के लिए निर्धारित है।

आईटीआर-4 (सुगम) उन कारोबारियों और पेशेवरों के लिए है जो अनुमानित कर व्यवस्था के तहत कर भुगतान करते हैं। गलत फॉर्म का चयन करने पर रिटर्न दोषपूर्ण माना जा सकता है।

समय पर आईटीआर नहीं भरा तो क्या होगा?

यदि कोई करदाता निर्धारित समय सीमा तक आईटीआर दाखिल नहीं करता है तो वह बाद में भी रिटर्न जमा कर सकता है, लेकिन इसके लिए 5,000 रुपये तक का विलंब शुल्क देना पड़ सकता है। यदि कोई टैक्स बकाया है तो उस पर नियमानुसार ब्याज भी देना होगा।

 

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